अगस्त 12, 2012

POST : 36 हर मोड़ पर लिखा था आगे नहीं है जाना ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

      हर मोड़ पर लिखा था आगे नहीं है जाना ( ग़ज़ल ) 

                           डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

हर मोड़ पर लिखा था आगे नहीं है जाना
कोई कभी हिदायत ये आज तक न माना ।

मझधार से बचाकर अब ले चलो किनारे
पतवार छूटती है तुम नाखुदा बचाना ।

कब मांगते हैं चांदी कब मांगते हैं सोना
रहने को झोंपड़ी हो दो वक़्त का हो खाना ।

अब वो ग़ज़ल सुनाओ जो दर्द सब भुला दे
खुशियाँ कहाँ मिलेंगी ये राज़ अब बताना ।

ये ज़िन्दगी से पूछा हम जा कहाँ रहे हैं
किस दिन कहीं बनेगा अपना भी आशियाना ।

मुश्किल कभी लगें जब ये ज़िन्दगी की राहें
मंज़िल को याद रखना मत राह भूल जाना ।

हर कारवां से कोई ये कह रहा है  ' तनहा '
पीछे जो रह गए हैं उनको था साथ लाना । 
 

 
 


 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

पीछे जो रह गए....wahhh बहुत खूब