सितंबर 20, 2026

POST : 2121 खोखली बातें विकसित भारत की ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

     खोखली  बातें विकसित भारत की ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया 

तेरे वादे पे जिये हम तो ये जान ए झूठ जाना , कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता ।  मुझे आज भी याद है डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने 2020 में विकसित भारत बनाने का सपना 1998 में दिखलाया था ।  और तब ये बात कोई ऐसे ही हवा हवाई ढंग से नहीं कही गई थी उनके नेतृत्व में करीब 500 विशेषज्ञों की टीम ने विज्ञान और भौतिकी विभाग के तहत भारत के विकास का इक विस्तृत तैयार किया था विज़न 2020 नाम से दस्तावेज़ लिखित जारी किया गया था ।  2020 आया भी और कोई आहट तक नहीं सुनाई दी उस घोषित सपने का अंजाम क्यों कैसा हुआ चिंतन करते तो मुमकिन है शासकों को थोड़ा शर्मिंदगी का एहसास हुआ होता ।  उस से पहले भी कभी बीस सूत्री कार्यक्रम कभी कितने और अलग अलग योजनाओं की घोषणा होती रही मगर सभी का नतीजा शून्य निकला ।  दर्द बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की , लेकिन आधुनिक कार्यकाल में पिछले 12 सालों में अनगिनत योजनाओं की घोषणा का इतिहास रचा गया और शायद एक भी साधरण जनता की खातिर घोषित योजना सफल हुई नहीं बल्कि सभी झूठी कपोलकल्पनाएं साबित हुई हैं ।  लेकिन आज फिर से बात 2047 की करने लगे हैं कभी खुद अटल बिहारी बाजपेयी जी ने संसद में कहा था हम ने माना कि  तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन , ख़ाक हो जायेंगे हम तुम को ख़बर होने तक ।  आज 2020 से 2047 की बात के संदर्भ में उनकी बात सच साबित हुई है जैसा शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने 200 साल पहले कहा था । 
 
मुमकिन तो बहुत कुछ होता है लेकिन वादे करना अलग बात होती है इरादे करना दूसरी बात होती है ।  उदाहरण ढूंढने कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है अभी कुछ दिन पहले जेपी नड्डा जी ने ये रहस्य खोला था कि 2014 में केंद्र की सत्ता मिलते ही मोदी जी ने देश के सभी 768 जिलों में पार्टी के शानदार कार्यालय जिन में पांच तारा होटल से बढ़कर सुविधाएं हों बनाने का संकल्प लिया था , जिस में से लगभग 563 से अधिक बन चुके हैं और बाकी पर निर्माण कार्य जारी है ।  उनके लिए ज़मीन का अधिग्रहण किया जा चुका है और सभी जगह कार्यालयों में आधुनिक कॉन्फ्रेंस हाल मीटिंग रूम डिजिटल सुविधाएं दी जा रही हैं ।  कहते हैं हाथी के खाने के दांत अलग दिखाने के अलग होते हैं बिल्कुल उसी तरफ सत्ता अपने अपने दल से चंदा देने वालों की खातिर सब समय पर करती है जबकि जनता देश समाज को झांसे में रखने को दिखावे वाले दांत के अंदाज़ में आडंबर तमाशे आयोजित किए जाते रहते है जिनका हक़ीक़त से कोई लेना देना कभी नहीं होता है ।  जो उनकी विचारधारा की या महत्वाकांक्षा की बात थी राम मंदिर से नया संसद भवन ही नहीं कितने अन्य ऐसे कार्य भले घटिया निर्माण साबित हुए लेकिन जल्दी जल्दी पूरे किये जाते रहे हैं ।  
 
काला धन वापस लाना था मगर देश विदेश में काला धन और भी तेज़ी से बढ़ता गया है यहां तक कि कोई न्यायधीश भी कहते हैं कि नोटबंदी काला धन को सफ़ेद बनाने का माध्यम था , खुद मोदी जी भी कहते हैं उनको काले सफेद से कोई फ़र्क नहीं पड़ता निवेश होना चाहिए ।  शायद ही किसी विकसित देश में कथनी और करनी में इतना विरोधाभास होने पर भी सरकार और राजनीतिक दल खुद अपनी पीठ थपथपाते दिखाई दे सकते हैं , जिस बात को लेकर शर्मिंदगी होनी चाहिए उसी पर गौरान्वित होना भारत में संभव हुआ है ।  1998 में भी शायद उनको मालूम था 22 साल बाद 2020 की बात सभी भूल जाएंगे कितने ज़िंदा रहते हैं कितने मर जाते हैं इंतज़ार में सोचना ही ज़रूरी नहीं लगा होगा , अब वही इतिहास की भूल फिर से दोहराई जा रही है 21 साल बाद 2047 में कौन ज़िंदा रहेगा देखने को सोचने की आवश्यकता ही नहीं है ।  लेकिन पिछली सरकारों को पानी पी पी कर कोसने वाली सरकार के राजनेता अपनी उन्हीं नाकामियों पर कुछ भी नहीं कहते बल्कि कोशिश करते हैं कि गरीबी भूख बदहाली से अपने तमाम अनैतिक कार्यों पर पर्दा डालने का और लूट से संवैधानिक संस्थाओं का सत्यानास करने तक  समाज को ठगने छलने धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं ।  अभी भी कोई उनकी बातों पर भरोसा करेगा कभी नहीं देश की जनता को कुछ समय तक झांसे में रखना संभव है हमेशा को नहीं कभी भी नहीं । 
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Sabhi yojnao ka natija 0.....Bdhiya aalekh sir👌👍