आपने जब पिलाना छोड़ दिया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '
आपने जब पिलाना छोड़ दियामयकदे हमने जाना छोड़ दिया ।
रोज़ महफ़िल जमाना छोड़ दिया
घर किसी को बुलाना छोड़ दिया ।
अब कहीं आना जाना छोड़ दिया
आप का आशियाना छोड़ दिया ।
दोस्तों का ठिकाना छोड़ दिया
दुश्मनों से निभाना छोड़ दिया ।
ज़िंदगी को डराना छोड़ दिया
ज़हर अब रोज़ खाना छोड़ दिया ।
चारागर को बुलाना छोड़ दिया
दर्द को खुद बढ़ाना छोड़ दिया ।
गैर सारा ज़माना , छोड़ दिया
चारागर को बुलाना छोड़ दिया
दर्द को खुद बढ़ाना छोड़ दिया ।
गैर सारा ज़माना , छोड़ दिया
उस को अपना बनाना छोड़ दिया ।
प्यार का हर बहाना छोड़ दिया
प्यार का हर बहाना छोड़ दिया
रूठना - मान जाना छोड़ दिया ।
राज़ ' तनहा ' छुपाना छोड़ दिया
प्यार हर दिन जताना छोड़ दिया ।

1 टिप्पणी:
बहुत खूब wahh
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