मार्च 05, 2026

POST : 2063 हमको वापस अभी तो जाना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

  हमको वापस अभी तो जाना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' 

 
हमको वापस अभी तो जाना है  
इक ठिकाना , कहीं बनाना है ।  
 
लोग कितना बदल गए देखो 
रोज़ , कोई , नया बहाना है । 
 
उम्र भर , कौन साथ देता है 
एक दिन सब ने छोड़ जाना है । 
 
था बुरा कौन कौन अच्छा था 
सिर्फ़ बीता हुआ ,  ज़माना है । 
 
हमको आवाज़ कौन अब देगा 
किसलिए अब हमें बुलाना है । 
 
मुझको इतना ज़रा बताओ तो 
याद रखना , किसे भुलाना है ।
 
चंद सांसें अभी बची ' तनहा '
धड़कता दिल ठहर ही जाना है ।  
 

 

मार्च 03, 2026

POST : 2062 हम जिएं कैसे , हम मरें कैसे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

 हम जिएं कैसे , हम मरें कैसे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' 

 
हम जिएं कैसे , हम मरें कैसे  
क्या करें और क्या करें कैसे ।
 
जिस्म घायल है रूह भी घायल 
ज़ख़्म ही ज़ख़्म हैं , भरें कैसे । 
 
वो जो झांसों में उनके आ जाएं 
उनसे दुश्मन भी फिर डरें कैसे । 
 
हम न तदबीर ही करें कोई 
दोष तक़्दीर पर धरें कैसे । 
 
दुश्मनी हम से है ज़माने को 
' तनहा ' उल्फ़त भी हम करें कैसे ।  
 
 

   

मार्च 01, 2026

POST : 2061 अशांति का नॉबेल पुरस्कार ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

       अशांति का नॉबेल पुरस्कार ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

 कभी ऐसा होता नहीं कि किसी अमीर को कोई प्रेमिका ठुकरा कर किसी और की बन जाए । उनको पूरा यकीन था नॉबेल पुरस्कार का सबसे सही दावेदार सिर्फ वही हैं । फ़िल्मी कहानियों की तरह जो कभी नहीं होता घट गया उनको मांगने पर कितनी कोशिशों से भी नहीं मिला किसी और को बिना प्रयास ही प्राप्त हो गया । आशिक़ी में आधुनिक प्रेमी आंसू नहीं बहाते बल्कि समझते हैं कि उसकी किस्मत ही खराब थी जो मेरी नहीं हुई किसी और की हो गई । लेकिन बाहर कुछ भी कहते रहें ताकतवर लोग अंदर से खुद को अपनानित समझते हैं और नतीजा इसकी सज़ा दुनिया भर को देते रहते हैं जीवन भर अभद्रता पूर्वक आचरण करते हैं । लेखक उनका दर्द समझते हैं और उनसे संवेदना जताते हैं दिलासा दिलाना चाहते हैं समझाते हैं कभी किसी को सभी कुछ नहीं मिलता है पर ऐसी बातों से तकलीफ़ घटती नहीं बढ़ती ही है ।  
 
आप इस की कल्पना नहीं कर सकते कि जब किसी ताकतवर धनवान बाहुबली को उसकी मनवांछित चीज़ नहीं देते हैं तो उसकी अनबुझी प्यास उसको क्या से क्या बना देती है । उनको शांति का नॉबल पुरस्कार न देना कितना बड़ा अपराध है आपको नहीं मालूम था तो अब समझ गए होंगे । अपना आपा खोकर उन्होंने किस किस को कितनी बार अपमानित नहीं किया , तब भी उनको चैन नहीं आया तो देख लो उन्होंने उस दिखावे वाले किरदार को छोड़ अपना असली किरदार दुनिया को दिखलाया है । जो उनकी नहीं मानता उस पर मनचाहा टैरिफ़ लगाया है , भले खुद उनकी अदालत ने इसको अनुचित बताया है लेकिन कौन बच सकता है उन्होंने इक ऐसा जाल बिछाया है । सभी ने कुछ न कुछ खोया है बस इक वही है जिस ने जो चाहा सभी कुछ पाया है । सब उसकी माया है दुनिया उसको ख़लनायक समझती है कुछ भी कहती रहे उसको तो ये कर के दिल को चैन आया है । यकीन मानिये कि अगर उनको नॉबल पुरस्कार दे दिया गया होता तो उनको कुछ भी ऐसा करने में संकोच होता और भले कोई भी कारण होते वो अपने शांति पुरस्कार की लाज रखने को भले और शरीफ़ किरदार को निभाने को विवश होते ही । दुनिया की यही आदत है गुण नहीं दिखाई देते अवगुण नज़र आते हैं तभी लोग तानाशाह अन्यायी अत्याचारी बन कर अपनी शान बढ़ाते हैं । 
 
आपने उनका दिल दुखाया है अपनी भूल समझ कर प्रायश्चित करने को कोई उपाय करना ज़रूरी है , आंधी चलने लगी है चिंगारी सुलग रही है शोला भड़कना ज़रूरी है । पानी की खातिर कोई बरसात करवानी होगी उनकी नॉबेल संग तस्वीर बनवानी होगी । ऐसी इक अनोखी नई परंपरा चलाओ आधुनिक युग में शांति की कोई कद्र नहीं अशांति सभी को भाती है इक अशांति का नॉबल पुरस्कार चलाओ जिसका नियम ऐसा बनाओ हाथ जोड़ नहीं मांगो , छीन कर ले जाओ । दुनिया बैठी है परमाणु बम पर आप छोड़ दो शांतिगीत गाना चलो मिसाईल फैंको मौत का खेल रचाओ सभी कहेंगे आप से हमको बचाओ , आप लाशों पर खड़े होकर खुद को महान बतलाओ , जिस को भी चाहो मौत के घाट पहुंचाकर उसको ज़ालिम घोषित कर उचित ठहराओ । लोग आजकल सभी जगह खलनायकों पर फ़िदा हैं कोई आधुनिक गीत लिखो उनकी महिमा का बखान कर पत्थर से हीरा बन कर अपनी कीमत ऊंची लगवाओ । पत्रकारिता से आगे बढ़ो चाटुकारिता की पढ़ाई पढ़कर जिसकी खाते हो उसकी हाज़िरी लगाओ , हरियाणा में कहावत है जिसकी खाई बाजरी उसकी लगाई हाज़िरी । बहती हुई गंगा में हाथ धोने से काम नहीं चलता खुद नंगे होकर उन संग नहाओ नाचो झूमों मौज मनाओ कौन देखता है सोच कर कभी मत शर्माओ ।    
 

 हां हां मैं खलनायक हूं ( हास्य - कविता ) 

 
शराफ़त की कदर नहीं सुन मेरे यार
छोड़ भलाई डराने लगे भर के हुंकार   
आपने किया था उन पर अत्याचार 
उनको मांगने पर भी दिया नहीं था 
बस इक शांति का नॉबल पुरस्कार । 
 
छोड़ो उसकी बात करना है बेकार  
अब तो समझो अगर हैं समझदार 
क्या होता है उसका कोई आधार 
शुरू करो ऐसा ही अशांति पुरस्कार 
साबित होंगे वही सबसे बड़े हक़दार ।
 
 Ashantee Medal 1873 - 74 clasp Coomassie