अगस्त 30, 2012

ग़ज़ब किया ऐतबार किया ( कहानी ) डॉ लोक सेतिया

     ग़ज़ब किया ऐतबार किया  ( कहानी ) डॉ लोक सेतिया 

  कहानी बड़ी लंबी है संक्षेप में लिखना है जो नहीं लिखा जाना चाहिए पाठक खुद समझ सकते हैं । पुराने वक़्त की बात अलग हुआ करती थी पहली मुलाक़ात से दो दिल मिलने तक का सफर और शुरुआत से आखिर तक कभी झगड़ना कभी रूठना मनाना कभी कोई खलनायक कभी दूसरा चाहने वाला या चाहने वाली दरार डालते तो कभी समाज अमीर गरीब का ऐसे कितनी बातें होती थी । आजकल आधुनिक युग में शिक्षा से नौकरी तक अधिकांश युवा वर्ग के संबंध बनते टूटते रहते हैं । अलग अलग होने पर भी किसी को फुर्सत नहीं होती रोने या दिल टूटने को लेकर अफ़सोस करने की , तू है हरजाई तो अपना भी यही तौर सही तू नहीं और सही और नहीं और सही । इंटरनेट की दुनिया का खेल अजब ग़ज़ब है जिसका कोई भी चाहने वाला नहीं फेसबुक पर हज़ारों दोस्त बन जाते हैं । माना इस आधुनिक नकली दुनिया में भरोसा नहीं कौन क्या है और सच खोजना व्यर्थ है झूठ की पहचान नहीं होती है फिर भी लोग दोस्ती और अपनेपन की तलाश करते रहते हैं । सोशल मीडिया पर सच्चे मन से प्यार करने वाले दोनों का मिलना तकदीर से ही संभव है मगर कभी कभी नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है । सागर को दोस्ती का नशा है वास्तविक जीवन में दोस्तों से खट्टे मीठे अनुभव मिलते रहे हैं फेसबुक पर ढूंढने की कोशिश भी कितने रंग दिखाती रही है मगर उसको भरोसा है कभी न कभी कोई न कोई तो मिलेगा या मिल जाएगी । 
 
    दोस्ती करने को सागर ने रिक्वेस्ट भेजी ही थी कि वर्षा ने स्वीकार कर ली , कुछ दिनों से वर्षा सागर की पोस्ट पढ़ रही थी और लाइक कमेंट भी करती थी । सागर ने देखा वर्षा के सैंकड़ों दोस्त बने हुए थे जो उसकी पोस्ट को पसंद कर रहे थे समझ कर शायद कम महिला होने से अधिक ऐसा महसूस हुआ । इक पोस्ट ने सागर को भी प्रभावित किया जो इक जानी मानी लेखिका के जीवन को लेकर लिखी गई थी । दिल से प्यार करने वाला मिला भी आधी उम्र गुज़रने के बाद उसे बोली पहले मिलते बड़ी देर से मिले और मैं उन जगहों भटकती रही जिन में मेरे लिए जगह नहीं थी । जाने क्या सोचकर इस बात ने वर्षा की मन की बात समझने को सागर ने संदेश भेजा था परिचय जानने को और वर्षा ने साथ साथ जवाब दे दिया था । सागर ने बताया था अपने बारे में फिर कहा था उचित समझती हैं तो अपने बारे बताएं और वर्षा ने अपनी नौकरी और अन्य निजी जानकारी दे दी थी । बिना मांगे ही कुछ फोटो भी अपने कई दोस्तों के साथ भेज कर कौन हैं बता दिया था । सागर ने कहा क्या आप हर किसी को अपनी जानकारी आसानी से दे देती हैं मुझे तो बड़ा संकोच होता है जबकि मैं इक पुरुष हूं और आप महिला हैं फिर भी आपको कोई डर नहीं लगता है । सागर को किसी महिला से जिस से कुछ दिन की पहचान हो सोशल मीडिया पर बेबाकी से ऐसा पूछना खुद ही लगा कि उचित नहीं है । वर्षा कुछ जवाब देती उस से पहले सागर ने कहा वर्षा जी मुझसे भूल हुई ऐसा नहीं पूछना चाहिए था कृपया इसे अन्यथा नहीं लेना ।
 
       वर्षा ने जवाब दिया सागर जी मैंने आपसे दोस्ती यही देख कर सोच कर की थी कि आप अन्य पुरुषों की तरह महिला से चिकनी चुपड़ी बातें नहीं करते । सच कहूं मुझे पहली बार कोई सही व्यक्ति मिला है जो महिलाओं को अलग ढंग से देखता है कोई चीज़ या खिलौना नहीं समझता । मेरी अधिकांश दोस्त महिलाएं हैं जो अकेली हैं और निराश होकर बातें करती हैं । आप की पोस्ट आशावादी भविष्य की बात समझाती हैं उदासी में भी खुश रहना कैसे पता चलता है । तभी मैंने जान बूझ कर आपसे खुल कर बात की हैं ताकि पता चले कहीं जैसा मुझे लगता है कि आप इक सही इंसान हैं जो मौका मिलते औरत से प्यार की लगाव की बातें करते हैं तमाम लोग आप उन जैसे नहीं हैं । आपने मेरा भरोसा जीत लिया है नहीं तो मैं किसी भी पुरुष की अनुचित बात से परेशान होकर उसे अनफ्रेंड  करने को विवश हो जाती हूं । थोड़े दिनों में दोनों खुल कर आपसी बातें करने लगे थे दोनों । वर्षा कभी कभी बेहद निराशाजनक बात कहती तो उसे सागर समझाता की कठिनाइयां सभी के जीवन में होती हैं घबराने से नहीं साहस से उलझने सुलझाने की ज़रूरत होती है । वर्षा खुद को कमज़ोर अकेली महिला बताती तो सागर समझाता नहीं आप जिस तरह से संघर्ष कर रही हो शायद बहुत कम महिलाएं कर सकती हैं । जब कोई सच्चा दोस्त साथ हो तो कुछ भी हो चिंता की बात नहीं मिलकर रास्ता बनाते हैं । इस तरह महीने भर में उनकी गहरी दोस्ती हो गई थी जैसे जाने कब से जान पहचान हो उनकी और बात करते करते दोस्ती को फेसबुक से अच्छी वास्तविक ज़िंदगी में हमेशा निभाने का वादा कर लिया था वर्षा और सागर ने । आपसी विश्वास को साबित करने को अपने पासवर्ड भी सांझा करते हुए आपस में इक दूजे से जुड़े शब्द संख्या रख ली थी । आपसी किसी भी अच्छी बुरी बात को शेयर करने और कभी अन्य किसी से भी नहीं बताने की बात का विश्वास हो गया था दोनों को ।     
 
   वर्षा को जाने क्या हुआ जो उस ने अपने अंतर्मन की कितनी राज़ की सब से छुपाई बातों को सागर को बताई और अपने साथ घटी अनहोनी घटनाओं को भी सांझा जब ये वादा किया था सागर ने कि वो कभी आपसी राज़ की बात को अपने सिवा कभी नहीं ज़ाहिर होने देंगे । कितने सालों से जो बोझ था सागर से खुलकर बात करते ही खुद को मुक्त महसूस करने लगी वर्षा । अनावश्यक मानसिक तनाव और बोझ से राहत का अनुभव किया क्योंकि किसी भी बात से सागर का प्यार भरोसा कम नहीं हुआ बल्कि और भी गहरा नाता बन गया जो जीवन में शायद ही कभी किसी को नसीब होता है । वर्षा को ये जानकर ख़ुशी हुई कि सागर उसे हमेशा सही समझेगा और पिछले जीवन की किसी घटना से उसे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा बल्कि उसने कहा था कि हर किसी का पुराना बहुत कुछ होता है और जब हम नये रिश्ते बनाते हैं तो उस को छोड़ आज और आने वाले कल की बात करते हैं । सोशल मीडिया पर दोस्ती कब कैसे इक शानदार रिश्ते में बदल गई दोनों को खबर नहीं चली । अलग अलग शहरों में रहते हुए रात दिन इक साथ होने का अनूठा अनुभव था दोनों को , लगता जैसे युगों से पहचान है । सागर ने इक दिन कहा था हर सुबह हम अपनी उस दिन की ताज़ा फोटो आपस में भेजते हैं और अपनी पसंद पूछते बताते हैं , मुझे जो रंग अच्छा लगता है कभी उस में कुछ पहन कर अपनी फोटो भेजना यही उपहार मुझे दोस्ती का चाहिए ।  
 
    सागर को वर्षा की मानसिक दशा अपने जैसी लगी थी जाने क्यों मन चाहा उसकी निराशा को भगाकर उसके आंचल को आशा के फूलों से भर दे । वर्षा के जीवन साथी का निधन हो चुका था और उसको कोई भी व्यक्ति साथ और मार्गदर्शन को मिला नहीं था जिस से मन की चिंता की बात कह सके और साहस से ज़िंदगी को बेहतर बना सके । वर्षा अपने वास्तविक जीवन की समस्याएं सागर को बताती और सागर उनका समाधान बता देता । कुछ ही दिन में वर्षा को सागर में अपने सपनों का हमराही दिखाई देने लगा था । सागर को जीवन में कोई दोस्त नहीं मिला था मगर जाने क्यों वर्षा से बात करने के बाद महसूस हुआ यही मेरी ज़िंदगी की तलाश है । वर्षा को समझ आ गया था कि सागर को किसी अपने की चाहत है । दुनिया की नज़र में और सामाजिक बंधनों में बंधे दोनों किसी रिश्ते में नहीं बंध सकते थे ये बात जान कर भी दोनों अपने अपने दिल पर काबू नहीं रख पा रहे थे । कोई जैसे उनको इक दूसरे की तरफ खींच रहा था मगर मन में दुविधा थी कि दोनों नहीं समझ पा रहे थे दूसरे की भावना क्या है । कहीं वो मुझे गलत ही नहीं समझ ले और दोस्ती का भी रिश्ता टूट नहीं जाए । जाने अनजाने सागर वर्षा दोस्त से बढ़कर हमराज़ और शुभचिंतक बन गए थे ।

     इक दिन वर्षा ने सागर की निजी ज़िंदगी को लेकर पूछ ही लिया मैंने अपनी ज़िंदगी की किताब खोल कर रख दी मगर आपने अपनी ज़िंदगी को लेकर कुछ भी बताया नहीं । आपकी कविताओं से निराशा झलकती है जब भी पढ़ती हूं दिल चाहता है आपके सभी दुःख दर्द बांट लूं और आपको हर ख़ुशी दे दूं जैसे आप मुझे देना चाहते हैं । सागर ने बताया उसको कोई गिला शिकवा किसी से नहीं है बस यही नहीं जानता क्यों कोई भी मुझसे प्यार नहीं करता , दोस्त रिश्तेदार सभी मुझे पसंद नहीं करते भले कितना सब के लिए करता रहूं ।  वर्षा ने सुना तो यही समझा कि वास्तव में हम दोनों एक जैसे अकेले अकेले हैं कहने को बाक़ी सब हैं लेकिन प्यार की प्यास अधूरी है दोनों की । वर्षा ने सागर को कहा मुझे आपसे कुछ मांगना है इनकार करोगे तो मैं फिर से टूट के बिखर जाउंगी । सागर ने पूछा ऐसा क्या चाहिए मुझसे मुमकिन होगा तो अपनी प्यारी दोस्त को अवश्य दे सकता हूं , वर्षा ने कहा मुझे जन्म दिन पर आपकी पसंद के परिधान पहनने हैं आपसे अनुमति चाहिए । मुझ से अनुमति की क्या आवश्यकता है सागर ने पूछा तो वर्षा ने समझाया फिर से इक विवाहिता होना चाहती हूं अकेली रहते थक गई हूं आपने जब कहा मुझे अपनी पसंद का पहनने को तो महसूस हुआ ऐसा आपके नाम की बिंदी लगा कर करना चाहूंगी मेरा सौभाग्य होगा अगर आपके दिल में जगह मिले मुझे । सागर ने कहा मेरी पत्नी है ऐसे में ये उचित नहीं है तो वर्षा ने कहा मैंने आपको अपना सब कुछ मान लिया है मुझे दोबारा वही दर्द नहीं झेलना है अकेली होने का मुझे बीच में छोड़ना मत । सागर दुविधा में पड़ गया था उस ने कहा वर्षा आप अकेली हैं ये सोच सकती हैं मैं अपनी सामाजिक सीमाओं का उलंघन नहीं कर सकता हां आपके लिए मेरा लगाव और दोस्ती की चाहत किसी भी अन्य रिश्ते से कम नहीं है । शायद अभी आप भावनाओं में बही समझ नहीं रही कि ऐसा नाता रखना भविष्य में हमारे लिए समस्या बन सकता है , वर्षा ने कहा आपकी मर्ज़ी है मुझे कोई सामाजिक वास्तविक नाता नहीं चाहिए मन आत्मा से आपकी होना चाहती ही नहीं बल्कि बन चुकी हूं  । आपको अपनी पत्नी से अलग नहीं होना न कभी हम साथ रह सकते हैं सिर्फ आपसी रिश्ते को इतना स्थाई बनाना है जो चाहे कहीं भी हों मन से प्रेमी प्रेमिका जैसे राधा कृष्ण का नाता समझा जाता है । हमको कभी किसी को भी नहीं बताना बस हम एक दूसरे का हाथ जीवन भर थामने का वादा करते हैं ।
 
       वर्षा ने बिना सोचे बोल दिया साथ नहीं रह सकते , अलग नहीं हो सकते दिल से रिश्ता निभाना है नहीं तो मैं जी नहीं सकती । वर्षा ने कहा आपको मुझसे कुछ भी कहने का अधिकार है और हम किसी छोटी सी बात से अपने साथ को कभी छोड़ नहीं सकते हैं । आज आपको बताती हूं मुझसे किसी ने पहले कोई दोस्ती वाला रिश्ता बनाना चाहा तो मैंने उसको हमेशा रोक दिया और साफ साफ कह दिया कि अकेली होने से हर किसी से दोस्ती नहीं करती महिला , जब वास्तव में कोई अच्छा लगता है तभी उस से खुलकर बात करती है औरत । आपको पसंद करने लगी हूं आपकी बनकर खुद को पूर्ण करना चाहती हूं अभी अधूरी होने का एहसास है मुझे आपकी बनकर सब हासिल हो जाएगा आपको मुझ पर और मुझे खुद से बढ़कर आप पर भरोसा है तभी आप से दिल की बात कह रही हूं । सागर आपको अगर मैं खुद करीब नहीं आने देना चाहती तो आप कभी कदम बढ़ाते ही नहीं वास्तव में मैंने चाहा तभी आप दिल को अपना बना आपके दिल को भी मज़बूर कर दिया और खुद आप मुझसे प्यार करते हैं समझती हूं मानने से डरते हैं । अभी तक खामोश रही जब से आपको सोशल मीडिया पर दोस्त बनाया क्योंकि मैं अकेली थी और आप अपनी पत्नी के साथ हैं जानती थी समझ कर भी आपको प्यार करने लगी थी , खुल कर बात की तब समझी हमारा प्यार दोनों की ज़िंदगी की ज़रूरत है मुझे अपनी बनाओ नहीं बनाओ मैं आपकी हो गई हूं । पहला इकरार महिला करे क्या या आपको ठीक नहीं लगता है सागरजी । खाओ कसम मुझे नहीं करते प्यार दिल ही दिल में सागर आप मेरा पहला प्यार हैं और अंतिम भी कोई और मेरे जीवन में नहीं है न था न कभी होगा । 
 
   सागर ने पूछा था वर्षा क्या इक बात कहूं तो आपको पसंद नहीं भी हो तो नाराज़ नहीं होगी , वर्षा ने जवाब दिया बिल्कुल भी नहीं । सागर ने कहा मुझे लगता  है कि जैसे आपको प्यार होने लगा है क्या मुझे अगर आप के पति होते तब ऐसा  महसूस हुआ होता तब भी आपको उचित लगता । वर्षा का जवाब था दिल से सच्चा प्यार होना होता है तब हो ही जाता है और मैं तब भी आपके प्यार को स्वीकार करती कोई संकोच नहीं होता मुझे ज़रा भी । सागर बोले वर्षा आप मेरे विवाहित जीवन की वास्तविकता से परिचित हैं क्या आपका मुझे ऐसे प्रेम करने को प्रस्तावित  करना सही है क्या । वर्षा हंसते हुए बोली मुहब्बत और जंग में सब उचित है मेरा ऐसा करना अनुचित नहीं है । ऐसे क्षणों में दो चाहने वाले दिल से विवश हो एक हो जाते हैं यही होना था । 

  वर्षा ने कहा की आपने मेरे  मन की बात मानी है ये कहकर कि जब आप इतना दिल से आत्मा से समझती हैं तो भला मैं ऐसे प्यार को कैसे ठुकरा सकता हूं । सामाजिक रूप से नहीं बन सकते हैं एक दूसरे को समझ सकते हैं सब कुछ बस ये दुनिया से छुपा कर रखना ज़रूरी है , तब तो  मेरे लिए आप मेरे प्रेमी से बढ़कर  हैं और मैं आपकी इक पुजारिन बनकर खुद को समर्पित करना चाहती हूं । मेरे मन में इक दुविधा है कि भगवान के चरणों में कभी बासी फूल नहीं चढ़ाए जाते और मैं पहले कभी से शारीरिक संबंध रखती रही हूं । भले इतने सालों से अकेली हूं किसी को लेकर मन में कुछ भी नहीं अनुभव किया आपको सोचती हूं जी भर रात दिन निहारती ही रहूं । सागर ने समझाया वर्षा  तुम्हारा मन तुम्हारी आत्मा को कभी किसी ने छुवा नहीं और तुम पावन हो बिल्कुल नए खिले पुष्प की जैसी हो ये विचार मन से निकाल दो और हम सिर्फ इक दूसरे के हैं यही सच है । अपना प्यार का रिश्ता मन का आत्मा का है और साथ रहने से शारीरिक संबंध होने नहीं होने से कोई अंतर नहीं पड़ेगा क्योंकि हम भीतरी भावनाओं को समझकर जुड़े हैं जो कभी बदलते नहीं हैं । 
 
   वर्षा ने दिल से गीत गाकर सुनाया था , तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा तुम्हीं देवता हो । सागर को जाने क्यों बहुत अच्छा लगा और महसूस हुआ जैसे वर्षा वास्तव में उसे अपना सब कुछ समझती है । सागर ने कहा वर्षा ये कहकर तुमने मुझे सब कुछ दे दिया है ये मेरी खुशनसीबी है ।  वर्षा ने कहा मुझे अपने चरणों में रखना यही चाहती आपका आशिर्वाद हमेशा खुश रहने का आपकी बन रहने का । सागर ने कहा था जैसा तुम सोचती समझती हो मैं मानता हूं तुम इक अनखिली कली सी अनछुई सी हो जिस को पहली बार मैंने सपर्श किया है वो भी कितनी दूर से मन ही मन में । वर्षा खुद को वास्तव में कुंवारी लड़की जैसा महसूस करती थी किसी पुरुष से कोई शारीरिक संबंध का बिलकुल भी अनुभव उसको कभी नहीं हुआ था साथ रहते हुए भी पति से जैसा सिर्फ दूर से बातें करते सागर से होने लगा था और हर पल महसूस करती थी  मुझे केवल प्रेमिका नहीं बनना भले दुनिया समाज को नहीं बता सकते मगर चाहती हूं पर आप हम इक दूजे को जीवन साथी समझें यही दिल की आरज़ू है । सागर को भी वर्षा से मन ही मन प्यार की अनुभूति होती रहती हमेशा बिना करीब से देखे छुवे बगैर । 
 
   सागर वर्षा नियमित बात करते रहे । कभी वर्षा कहती मिलने आने को , मगर सागर संकोच वश और सामाजिक हालात को समझ उसको कहता कि शायद ही कभी मुमकिन हो मुझे भी लगता है लेकिन अभी नहीं मिलना हो सकता है । वर्षा चाहती थी रिश्ता आधा अधूरा नहीं हो अगर है तो पूरी तरह से हो । सागर वर्षा की मन की बात और जीवन साथी की ज़रूरत समझने लगा था और इक दिन उसने कहा क्या तुम मुझे दिल आत्मा से अपना  पति समझती महसूस करती हो  , कुछ ही पल में वर्षा ने हां बोल कर कहा था मुझे ये पता था इक दिन आप खुद ये मुझे कहोगे मैं इंतज़ार कर रही थी लेकिन आपने मुझे पूछा है जबकि बताना आपको है मुझे अपनी समझते हैं मानते हैं  । काश आप मुझे पहले मिल जाते इतने साल जब से अकेली रहती रही हूं बिना साजन महिला का जीवन बेहद कठिन होता है । इस तरह से बड़ी दूर रहते हुए वर्षा और सागर ने खुलकर बातें की आपसी प्रेम संबंध को लेकर जो भी दिल चाहता है परिणय की बेला में करना एक दूसरे के साथ बिना संकोच । वर्षा जिस तरह से निसंकोच अपनी चाह को बताती रही सागर को हमेशा उसी तरह की प्रेमिका की चाहत रहती थी ।  

  दिल से आत्मा से चाहने के बाद भी फासले बहुत थे दूरी मन की नहीं मगर हालात की मज़बूरी थी । कभी मिलते मिलते रह गए कभी हौसला नहीं किया दुनिया से डर कर । आपस में रूठना मनाना कभी किसी बात पर खफ़ा होकर संपर्क नहीं रखना बीच बीच में हुआ मगर दोनों की चाहत बढ़ती गई कम हुई नहीं कभी । वर्षा को कभी निराशा होती तो कहती मुझे लगता है हम कभी मिल नहीं सकेंगे भरोसा डगमगाने लगता तब सागर उसको संभालता और भरोसा कायम रखने को मान जाती वर्षा ऐसे में कहती मुझे आप पर खुद से बढ़कर यकीन है । मुझे तो सब आपकी मर्ज़ी से करना है मेरे लिए आप मेरी नैया के खेवनहार हो मेरे स्वामी भगवान सभी बस आप को मानती हूं । सागर ये सुनकर और अधिक चाहता वर्षा को हर तरह से ख़ुशी देना । जब भी वर्षा का मन जो भी चाहता सागर वही खुद कहता और उसकी कामना को पूर्ण करता रहता । 
 
        वर्षा को लगता है कि उसकी प्रेम कहानी आधी अधूरी है सागर से मिलन कभी नहीं हो सकेगा ।   मगर अभी उसकी मन भी भावना रह गई है । सागर ने कितनी बार पूछा मगर वर्षा किसी न किसी कारण खुलकर अपनी भावनाएं उजागर नहीं कर सकी । उसका मन अभी अपने सागर से मिलन और जीवन भर इक साथ खुल कर जीने को करता है । कभी सागर खुद को कैद में बंद पंछी समझता था मगर जब उसने खुद को आज़ाद कर लिया है तो वर्षा को अपनी जंज़ीरें तोड़ने की कोई तरकीब नहीं मिल रही है । सागर से मिलन को वर्षा को बरसना नदी बनकर बहना और मीलों की दूरी तय कर सागर की बाहों में समाना है । चाहकर भी वर्षा अपने सागर को अपने पास आने को नहीं कह सकती है । सागर विश्वास करता है कभी किसी दिन किसी तरह दोनों का ये फ़ासला ख़त्म होना ही है । चाहत दोनों को बराबर है बढ़ती जाती है पल पल हर दिन मुहब्बत में इंतज़ार के पल बड़े लंबे हुआ करते हैं । मगर सागर को भरोसा है किसी दिन वर्षा और वह इक साथ अवश्य होंगे उनका मिलन जन्म जन्म के लिए होना ही है । वर्षा की भी यही कामना है मगर उसका मन विचलित हो जाता है उस से और इंतज़ार सहा जाता नहीं और वर्षा को नदिया बनकर बहुत दूरी तय करनी है अपने सागर की बाहों में जाकर समाने को बेताब है ।
 
   सागर ने हमेशा वर्षा से प्यार किया और निभाया चाहे हालात बदलते रहे मगर वर्षा का मन कभी कभी इक दुविधा का शिकार होने लगता । सागर की तरह अपने प्यार को सब से छुपा कर रखना वर्षा को नहीं आया और उस के करीबी लोगों को शक होने लगा कि उसके जीवन में कोई पुरुष है जो दोस्त नहीं कुछ अधिक करीबी है । संबंध तोड़ने का कोई कारण नहीं था और वर्षा भी फिर से अकेली नहीं होना चाहती थी ये संभव ही नहीं था कई वर्ष बीत गए थे , पीछे लौट जाना और ऐसा दिल से दिमाग़ से भूलना असंभव था । अपनी विवशता बताकर वर्षा ने संपर्क करना छोड़ दिया और केवल ख़ास अवसर पर औपचारिक  वार्तालाप तक सिमित हो गई है सागर पूछता है कि क्या रिश्ता नहीं रख सकती तो वर्षा सोच कर जवाब देने की बात कहती है क्योंकि दिल और दिमाग़ अलग अलग ढंग से समझते हैं मन संग रहना चाहता और दिमाग़ सामाजिक मर्यादा से डरता है घबराता है । उनका प्यार इक दोराहे पर खड़ा है और वो वर्षा जो खुद हर सीमा पार करने की बात का हौसला रखती थी ज़रा सी गर्म हवा से विचलित हो गई है । सागर से अलग होना नहीं चाहती और साथ निभाना भी उसे कठिन लगता है । 
                  
    सागर ने पहले ही बता दिया था हमारे संबंध को दुनिया से छुपा कर रखना ही होगा , क्योंकि परिवार समाज हम दोनों की दिल की चाहत ज़िंदगी जीने और खुश रहने की ज़रूरत नहीं समझ सकते हैं । वर्षा से खुद अपनी प्यार की बात छुपानी मुश्किल हो गई और उसके करीबी लोगों को पता चल ही गया कि कोई है जिस से वर्षा का नाता है । लेकिन दुनिया क्या सोचती समझती है प्यार करने वाले अपनी मुहब्बत को हमेशा पवित्र बंधन मानते है भले किसी कारण दूरियां बन जाएं तब भी मन अपने प्यार के पास रहता है । वर्षा की दुविधा है जो खुद सोचने लगी है हमारा प्यार सच्चा है सब से बढ़ कर है फिर भी पावन रिश्ता नहीं है ये बात सागर को मंज़ूर नहीं है ये दुनिया कह सकती है लोग समझ सकते हैं दो दिल से प्यार करने वाले दो दिल दो जिस्म इक जान हों जो कभी नहीं मान सकते हैं । जन्म जन्म की बात करते करते अभी से घबरा कर रिश्ते को गलत नहीं कह सकते हैं सागर नहीं जानता कैसे वर्षा को समझाए ये इम्तिहान हर आशिक़ महबूबा का इक न इक दिन होता ही है किसी अपराधबोध की आवश्यकता नहीं है । वर्षा ने बहुत पहले इक प्रेम पत्र लिख कर भेजा था सागर की बात रखने को और इक और पत्र भेजा है जो सागर नहीं समझ पाया क्या मतलब है वर्षा को शायद महसूस होता है कि खुद से प्यार करना किसी पर दिलो जान से न्यौछावर होना अच्छा है मगर बढ़ती उम्र में ये किया जो भूल थी क्योंकि ये उम्र नासमझी की बाली उम्र नहीं है प्यार पाने की नहीं चाह रखना और प्यार करना दो बातें हैं । सागर को याद है कभी वर्षा ही कहती थी इश्क़ कभी भी हो सकता है और जब से प्यार हुआ वो खुद को नवयुवती महसूस करने लगी है । सागर ने वर्षा के पत्र को बदल कर उसे भेजा है ये लिख कर कि अपने सच्चे प्यार को हमेशा सही समझना है हमने कोई नासमझी में रिश्ता नहीं बनाया था । जन्म जन्म का साथ निभाने वाली ऐसे बदल जाएगी सागर ने कभी नहीं सोचा था । सागर ने वर्षा को वादा किया था निभाना है वर्षा बेशक विवश होकर कुछ समझती हो सागर ने यही कहा जवाब में कि हमेशा तुम्हारे रहेंगे । रूहों का संगम होना सुनते थे मगर इस आधुनिक समय में सोशल मीडिया पर ये बात किसी अनहोनी घटना जैसी लगती है , ये कल्पना है जो शायद कभी सच भी हो सकती है बात उम्मीद की है । वर्षा कभी पल पल की बात बताती रहती थी एक साथ कितने संदेश भेजती रहती थी और कहती सागर शुरू से पढ़ना तब आगे नीचे आते जाना पढ़ते हुए आजकल वही वर्षा कोई जवाब नहीं देती । फोन पर समय नहीं कह कर बात नहीं करती और बहाने बनाती है अकेली नहीं सभी लोग साथ हैं जबकि सागर जानता है वर्षा को जब बात करनी होती कई तरीके ढूंढ लिया करती और सागर को भी कहती ऐसा हम कभी कहीं भी बात कर सकते हैं । सागर को महसूस हुआ जैसे वर्षा का विश्वास अपने प्यार पर से डगमगा गया है , उसने वर्षा को संदेश भेजा था कि मुझे लगता है आपको मुझ पर भरोसा नहीं है अगर ऐसा है तो मैं विवश नहीं कर सकता और आप सिर्फ मज़बूरी से निभाना चाहें तो उसकी ज़रूरत नहीं है साफ बताएं । वर्षा ने संदेश देखा पढ़ा और कोई उतर नहीं दिया तो सागर ने यहीं विराम देना उचित समझा । कहानी सही अंजाम तक नहीं पहुंची लगता है । आधुनिक काल के सोशल मीडिया पर प्रेम कहानी इतने सालों तक कायम रही सागर की किस्मत वर्षा का संयम दोनों की बात है । भरोसा प्यार की पहली शर्त है जब तक रहता है सब अच्छा है नहीं तो लगता है ग़ज़ब किया तेरा ऐतबार किया ।

 
दिल के जज़्बात यही थे , मेरे तेरे एहसास यही थे 
पास थे और दूरियां थीं , तब भी दिन रात यही थे । 
 
नहीं मिलने की थी मज़बूरी , कुछ कदम की थी दूरी
नज़रें समझतीं थी बस , होंठों पर अल्फ़ाज़ नहीं थे । 
 
डर ज़माने का यही था , मिलते थे मिल पाते नहीं थे 
धड़कनों की आवाज़ यही , जानते थे समझते नहीं थे । 
 
ज़िंदगी कैसे बिताई हमने , दास्तां सुनी सुनाई हमने 
अलग-अलग रहकर भी पर , दिल से बिछुड़े नहीं थे । 
 
प्यार की मज़बूरियां कुछ , कुछ हौंसलों की भी कमी 
थे जुदा क्योंकि दोनों , इक मंज़िल के राही नहीं थे । 
 
सोचता हूं मैं आज तुम भी , सोचती हो बात यही कि 
ज़िंदगी पर हक़ होता काश , नसीब तो अपने नहीं थे । 
 
वो प्यार था पहला हमारा , याद है हमको वो नज़ारा 
दिल की बातें दिल में रखीं , कहना जो कहते नहीं थे । 
 
सोचता रहता हूं मैं जो , क्या तुम्हें भी महसूस होता है 
आज कुछ और बात है , मगर हालात कभी ऐसे नहीं थे ।
 

वर्षा को कहना संभव नहीं कोई संवाद ही नहीं होता है ऐसे में सागर को महसूस होता है । 

साथ अपने कोई नहीं था जीवन भर 
ख़्वाबों की इक दुनिया को सजाते रहे ।  

ज़िंदगी भर रास्ता बनते रहे मंज़िल का 
मुसाफिर कितने यहां से आते जाते रहे । 

हमको सपनों से मुहब्बत है बहुत मगर
लोग हमेशा हक़ीक़त दिखला डराते रहे ।




 
 

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