अगस्त 05, 2012

माँ के आंसू ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

    मां के आंसू ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

कौन समझेगा तेरी उदासी
तेरा यहाँ कोई नहीं है
उलझनें हैं साथ तेरे
कैसे उन्हें सुलझा सकोगी।

ज़िंदगी दी जिन्हें तूने
वो भी न हो सके जब तेरे
बेरहम दुनिया को तुम कैसे 
अपना बना सकोगी।

सीने में अपने दर्द सभी
कब तलक छिपा सकोगी
तुम्हें किस बात ने रुलाया आज
मां
तुम कैसे बता सकोगी।

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

Aapne Har maa ke dil ki baat ko itne ache se poem Mai utara hai aapka tah did se thanks Dr. Sahib