बहुत देखी आज़ादी ग़ुलामी देखिये ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया
आपको अभी भी समझ नहीं आया तो सरकार क्या करे , शुरू में ही आपको आगाह किया गया था विरोध अनुमति ले कर ही कर सकते हैं । अनुमति मिल भी गई थी तब भी काक्रोच जनता पार्टी को अंजाम दिखाई देना था पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी दमन करने में , सरकार समझौता कर कब बदल जाये मुकर जाये उसको कौन रोकेगा । फिर भी कोशिश थी इशारों इशारों से सावधान करने को चेतावनी कितनी तरह से दी गई दी जाती रही । जनता नासमझ है समझदार होती तो ये सभी दलों के राजनेता संसद की जगह किसी कैद में हो सकते थे , देशभक्ति ईमानदारी और संविधान कानून की बातें करने वाले राजनेता आला अधिकारी और ख़ास समझा जाता धनवान वर्ग कभी जनता और समाज के प्रति निष्ठावान नहीं होते हैं । कुर्सी और सत्ता उनका एकमात्र ध्येय रहता है , लोग उनकी शिकायत भी उन्हीं से करते हैं नतीजा शून्य मिलता है । आखिर सरकार ने सभी पर्दों को हटा दिया है और उसकी असली सूरत सीरत सामने है । विरोध प्रदर्शन करने को जंतर मंतर नहीं जहां सरकार को परेशानी नहीं हो दूर कहीं जाकर लोकतंत्र का मातम मनाते रहना , शायद तेहरवीं या श्रद्धांजलि सभा की तरह कुछ फूल चढ़ाकर औपचारिकता निभाते रहें ।
सरकार ने आपको नई व्यवस्था समझानी है , आपको आज़ादी विरोध प्रदर्शन इत्यादि बेकार की बातों को छोड़ कुछ नया आधुनिक सीखना समझना होगा । आप सत्ता का गुणगान करिये जहां मर्ज़ी जैसे मर्ज़ी सरकार खुश हो कर आपको मालामाल करेगी , यकीन नहीं हो तो टीवी चैनलों गोदी मीडिया से पूछिए । उनको ऐसा चश्मा मिलता है महंगा धन दौलत का जिस से उनको चारों तरफ विकास की चमक दमक दिखाई देती है कोई अन्याय अत्याचार कोई ज़ुल्म नहीं नज़र आता है । आप जिनको अंधभक्त कहते हैं उनसे जानिए कि ऐसा करने से क्या परमसुख प्राप्त होता है । पहले ग़ुलामी का मज़ा चखिए फिर कहिए आज़ादी का क्या करना है क्या अचार डालोगे । 79 साल की बूढी है आज़ादी उसकी हालत क्या पूछते हैं ज़िंदा है कि मर गई आपको खबर ही नहीं है ।



















