मंदिर में चोरी , भगवान की मर्ज़ी ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया
नारायण-नारायण , नारद जी अपने ही अंदाज़ में बोले , भगवन ये खबर सुनी है मंदिर से करोड़ों रुपया और सोना गायब है । कौन चोरी कर गया कोई रपट तक किसी थाने में नहीं लिखवाई गई । भगवान बोले आपको क्या परेशानी है भला मुझे मंदिर की दौलत से रूपये पैसे से क्या लेना देना है। जो जिसका कर्म है उसे वही करना है चोर चोरी नहीं करेगा तो क्या करेगा , आपको चिंता करनी चाहिए भारत देश की जनता की जिनका सभी कुछ राजनेता अधिकारी उद्योगपति धनवान लोग छीन कर झपट कर चालाकी से नहीं जालसाज़ी से देशसेवा की बात कहकर खुद अपने पर खर्च कर रहे हैं। आपको उनको डकैती की चिंता क्यों नहीं हुई और मंदिर से आपका मेरा क्या वास्ता है , मंदिर जिनका है उनको सब पता है चोर चोर मौसेरे भाई की बात है। सबका साथ सबका विकास है समझ आई उनकी बात है जूतों में बंट रही खैरात है सत्ता की शह है हुई जनता की मात है राजधानी की हक़ीक़त समझो चोरों की निकली नाचती झूमती बरात है। नारद जी कहने लगे भगवान इतनी गंभीर बात पर आप ठिठोली कर रहे हैं , भगवान बोले नारद जी आपको गलतफ़हमी हुई है मंदिर मेरी जायदाद नहीं है मैं कभी किसी मंदिर में नहीं रहता मैं तो लोगों के दिलों में बसता हूं। जिस दिन वहां से निकाला मुझे जिस जिस ने मेरा उनसे कोई नाता नहीं रहा है , मुझसे कभी पूछा आपने क्या क्या मैंने सहा है। दुनिया में मेरा अब कुछ भी नहीं रहा है भगवान की बनाई दुनिया को बर्बाद करने वाले शोर मचाते हैं हमने क्या क्या बनवाया है , सब झूठ की माया है शिकारी ने अपना जाल बिछाया है , मैंने सब धर्मराज पर छोड़ दिया है जैसा कोई करता है उसको फल मिलता है , कीचड़ में कमल खिलता है।
नारद जी को अब चैन आया है अपना भजन उनको याद आया है , मूर्ख बंदे क्या तुमने कमाया है भगवान की मर्ज़ी से बिना मेहनत धन पाया है चोरी करता है सीनाज़ोरी करता है क्या सितम तुमने ढाया है। बोल कितना खाया है कितना गंवाया है ऊपरवाले को भुलाकर अपना अनमोल जीवन व्यर्थ गंवाया है। नारद जी आधुनिक कथा सुनाते हैं लोग बिना बात घबराते हैं भगवान का नाम रटते रटते मरा मरा बोलने लगते हैं खोटा है जो उसको खरा कहने लगते हैं। इस दुनिया में सभी चोर हैं लेकिन कुछ चोर हरामखोर हैं जो अपने ही घर में चोरी करते हैं खुद ही देश का खज़ाना लुटवाते हैं। ये जो अमेरिका वाले हैं कितना ज़ुल्म कमाते हैं सभी को डराते धमकाते हैं और कितने कायर उनके सामने अपना सर झुकाते हैं। आप उनको महान बताते हैं जो नीचता करने से नहीं बाज़ आते हैं उनका अंजाम सभी को दिखाई देता है अब अमेरिका को होश आया है जब ऊंठ पहाड़ तले आया है। ये दुनिया बन गई चोरों का खुला बाज़ार है हर लुटेरा आजकल बन गया साहूकार है , सरकार कुछ भी है झूठ का इश्तिहार है जिसको डुबोया कहती है किया उद्धार है सभी को जाना भवसागर पार है।
खबर है कि यू पी पुलिस का कहना है कि एक करोड़ के सोने के गहने बारिश के पानी में गल गए , और बंदर उनको उठा ले गए। अदालत ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनको बरी किया था और पुलिस को ज़ब्त किए ज़ेवर ससुराल वालों को सौंपने का आदेश दिया था । 2007 में लखीमपुर के मोहल्ला कपूरथला निवासी मुद्रित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अदालत को पुलिस ने बताया कि ज़ेवर भीगने से खराब हो गए थे भीगी पोटली को मालखाने की छत पर सुखाने को रखा था जिसे बंदर उठा कर ले गए । भारतीय पुलिस ही ऐसे तर्क दे सकती है कि किसी की लाश से उतारे गहने बरामद कर सुरक्षित रखने और लौटाने के बजाय खुद हड़पने का शर्मनाक कार्य कर ऐसी बात अदालत में बताती है। यही पुलिस जांच करेगी मंदिर से पैसा और सोना चुराने या डाका डालने वालों को पकड़ने का काम करेगी तब कुछ ऐसा ही तर्क घड़ा जाएगा । चोरी का इल्ज़ाम बंदरों के सर मढ़ा जाएगा , अलीबाबा चालीस चोर का अगला अध्याय जल्द ही लिखा जाएगा । इक सवाल हमेशा बाकी खड़ा रह जाएगा ।
सवाल है ( हास्य व्यंग्य कविता ) डॉ लोक सेतिया
जूतों में बंटती दाल हैअब तो ऐसा हाल है
मर गए लोग भूख से
सड़ा गोदामों में माल है ।
बारिश के बस आंकड़े
सूखा हर इक ताल है
लोकतंत्र की बन रही
नित नई मिसाल है ।
भाषणों से पेट भरते
उम्मीद की बुझी मशाल है
मंत्री के जो मन भाए
वो बकरा हलाल है ।
कालिख उनके चेहरे की
कहलाती गुलाल है
जनता की धोती छोटी है
बड़ा सरकारी रुमाल है ।
झूठ सिंहासन पर बैठा
सच खड़ा फटेहाल है
जो न हल होगा कभी
गरीबी ऐसा सवाल है ।
घोटालों का देश है
मत कहो कंगाल है
सब जहां बेदर्द हैं
बस वही अस्पताल है ।
कल जहां था पर्वत
आज इक पाताल है
देश में हर कबाड़ी
हो चुका मालामाल है ।
बबूल बो कर खाते आम
हो रहा कमाल है
शीशे के घर वाला
रहा पत्थर उछाल है ।
चोर काम कर रहे
पुलिस की हड़ताल है
हास्य व्यंग्य हो गया
दर्द से बेहाल है ।
जीने का तो कभी
मरने का सवाल है ।
ढूंढता जवाब अपने
खो गया सवाल है ।














