अगस्त 29, 2012

POST : 97 मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

 
मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी
दर्द का इक जाम है ये ज़िंदगी ।

याद रहता है हमें जो उम्र भर
मौत का पैगाम है ये ज़िंदगी ।

मुस्कुराती सुबह आती है मगर
फीकी फीकी शाम है ये ज़िंदगी ।

है कभी फूलों सी कांटों सी कभी
नित नया अंजाम है ये ज़िंदगी ।
 
हार कर भी हार मत मानो कभी 
हर क़दम इल्हाम है ये ज़िंदगी ।  
 
बीच रस्ते में मुसाफ़िर मत रुको 
मत कहो आराम है ये ज़िंदगी ।  

जानते ये राज़ ' तनहा ' काश हम
इक बड़ा ईनाम   है ये ज़िंदगी ।
  
 
 

 
 
 

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