प्यास को हर जगह पानी लिखिंगे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया
प्यास को हर जगह पानी लिखेंगे
हम अगर अपनी कहानी लिखेंगे ।
उम्र भर जो दर्द देते रहे हैं
शुक्रिया लिख मेहरबानी लिखेंगे ।
कोशिशें की भूल पाए न लेकिन
फिर सभी बातें पुरानी लिखेंगे ।
कश्तियों को जो डुबोती हैं हर दिन
रोज़ लहरों की रवानी लिखेंगे ।
क्या कहें कैसा नया दौर लगता
राह से भटकी जवानी लिखेंगे ।
अश्क़ अपने सूख कब से गए हैं
ख़ुश्क आंखों की ज़ुबानी लिखेंगे ।
लिख रहे ' तनहा ' नहीं लोग समझे
एक दिन वो ख़ुद ही म'आनी लिखेंगे ।
