अगस्त 29, 2012

POST : 96 आपने जब पिलाना छोड़ दिया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

आपने जब पिलाना छोड़ दिया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  ' तनहा '

आपने जब पिलाना छोड़ दिया
मयकदे हमने जाना छोड़ दिया ।

रोज़ महफ़िल जमाना छोड़ दिया
घर किसी को बुलाना छोड़ दिया ।

अब कहीं आना जाना छोड़ दिया
आप का आशियाना छोड़ दिया ।

दोस्तों का ठिकाना छोड़ दिया
दुश्मनों से निभाना छोड़ दिया ।

ज़िंदगी को डराना छोड़ दिया 
ज़हर अब रोज़ खाना छोड़ दिया ।

चारागर को बुलाना छोड़ दिया
दर्द को खुद बढ़ाना छोड़ दिया ।

गैर सारा ज़माना , छोड़ दिया 
उस को अपना बनाना  छोड़ दिया ।
                                                    
प्यार का हर बहाना छोड़ दिया 
रूठना - मान जाना छोड़ दिया ।  
 
राज़ ' तनहा ' छुपाना छोड़ दिया  
प्यार हर दिन जताना छोड़ दिया ।