फ़रवरी 20, 2026

POST : 2059 आता नहीं झूठ बोलना जानते चोरी करना ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

       आता नहीं झूठ बोलना जानते चोरी करना  ( हास-परिहास ) 

                                     डॉ लोक सेतिया  

सत्यवादी हरीशचंद्र जी के वशंज कहलाते हैं , सत्य ही ईश्वर है की रट हम लगाते हैं , लेकिन अभी तक भी झूठ बोलने का सलीका नहीं आया है , जब भी बोलते हैं पकड़े जाते हैं । झूठ बोलने से कोई पाप नहीं लगता है कहते हैं जिस झूठ से किसी की चाहे खुद की ही भलाई हो उस से पाप नहीं लगता पुण्य समझते हैं । हम धर्मात्मा बनकर झूठ की कथा बांचते हैं सुनने वालों को मोह माया से बचने की बात करते हैं खुद मायाजाल में फंसते जाते हैं । झूठ का सागर बहुत गहरा है जो लोग डूबते हैं गहराई में पार उतर जाते हैं हीरे मोती उनकी झोली में भरते जाते हैं । हम चोर नहीं साहूकार कहलाते हैं चोरी करना अपना हुनर है दुनिया को दिखाते हैं असली चोर कभी नहीं पकड़े जाते हैं थानेदार बनकर कायदा कानून सबको समझाते हैं । कौन अपनी खामियां बताता है हर शख्स खुद को काबिल समझदार ईमानदार बतलाता है बस किसी की बात पर ऐतबार कभी किसी को नहीं आता है कोई ये बोलता नहीं समझता है झूठ बोलना सभी को खूब आता है । झूठ ही अपना सच कहलाता है सच से हमारा कभी नहीं रहता रिश्ता नाता है सच से हर शख़्स बचता है झूठ से ही दिल को चैन आता है सच कहने सुनने से दिल घबराता है । झूठ आपको मुसीबत से बचाता है सच का कोई भी ऐतबार ही नहीं करता कभी पति पत्नी से कहता है तो जाओ झूठे कहीं के सब मुझको समझ आता है । कहने का तातपर्य ये है कि झूठ हमको स्वीकार है झूठों की महफ़िल में होती जयजयकार है । झूठ दौड़ता है भागता है सभी मानते हैं कि दुनियादारी में झूठ ही चलता है सच हमेशा दिखाई देता हाथ मलता है । अदालत से लेकर संसद विधानसभाओं में सभी जगह झूठ का ही बोलबाला है सच कोई हरजाई है मतवाला है उसके लिए सभी के हाथ में कांटों की कोई माला है । झूठ का रिश्ता मधुर है बीवी का भाई साला है अपनी बहन का वही रखवाला है । सच सामने खड़ा भी दिखाई नहीं देता मुंह पर लगाया झूठ का इक ताला है आपको समझना है क्या गड़बड़झाला है । 
 
चोरी करते हैं हम सभी शान से कोई भी जगह हो घर दफ़्तर या किसी दुकान से ,  सीसीटीवी तक नहीं पकड़ पाते हैं चोरी चोरी लोग आंख मिलाते है दिल लूटते हैं आप पछताते हैं । दुनिया में हम जैसा कोई और नहीं है चोरों की नगरी में शराफ़त का चलता ज़ोर नहीं । शरीफ़ लोग शराफ़त में मारे जाते हैं असली चोर मौज करते हैं बड़े भलेमानस कहलाते हैं । भगवान जिसको हमने बनाकर कहीं बिठाया है उस ईमारत को भी चोरी के धन से बनवाया है चोरी करने बच भी जाएं तब भी हेरा फेरी से नहीं बचते हैं । हम अपने पांव ख़ामोशी से छुप कर रखते हैं खुद को छोड़ सभी पर नज़र रखते हैं । दुनिया जानती नहीं कितना बड़ा कमाल है चोरी का जितना भी माल है भरी उसी से अपनी टकसाल है । चालीस चोर इक अलीबाबा की कहानी पुरानी है आजकी दास्तान आधुनिक है सुहानी है देश का सभी कुछ कब कौन कैसे चुराता है जनता को खबर नहीं उसका अपना हमदर्द बनकर कौन उसका हक का सब खाकर दानवीर कहलाता है । चोरी की शिक्षा कलाकारी भी कहलाती है कोई विश्वविद्यालय ये हुनर सिखाता है चोरी के माल को अपना बताकर  फंस जाता है ख़बर से हैरान सभी लोग होते हैं चोरी करने में ऐसी गलती हमसे कैसे हुई है हमने दुनिया को हमेशा ठेंगा दिखाया है चोरी भी सीनाज़ोरी भी सबक सीखा है पढ़ाया है । सभी का सर चकराया है जब ऊंठ पहाड़ के नीचे आया है । 
 लोहे के मशीने कुत्ते पर आँसू बहाने से क्या होगा। यह सिर्फ़ एक यूनिवर्सिटी  की बात नहीं है, सारे शिक्षा जगत में गलघोंटिया प्रयोग चल रहा है ...

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

विश्वस्तरीय AI समिट के मंच पर पकड़े गए झूठ ...से निकला लेख आईना दिखता