कौन गांधी , कैसा गांधी , किसका गांधी ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया
आपका कोई पता ठिकाना मालूम नहीं वर्ना आपको पत्र लिखता डाक से भेजता , आधुनिक युग है बापू क्या होता है महात्मा कैसे होते हैं मायने नहीं जानते लोग । आपकी अहिंसा की बात व्यर्थ प्रतीत होती है क्योंकि आजकल धौंस धमकी दे कर ताकतवर देश कमज़ोर देशों को विवश करते हैं अपनी बात मनवाने को । कहने को लोकतंत्र कहलाते हैं जबकि अन्य देशों की संप्रभुता की रत्ती भर भी परवाह नहीं करते हैं । आपको समाधि पर जाकर शीश झुकाते हैं तमाम देश विदेश के राजनेता लेकिन किसी को गांधीवादी विचारधारा की कोई परवाह नहीं है । कुछ लोग कहते हैं कि आज़ादी आपकी अहिंसा की नीति से चरखा चलाने से स्वदेशी को अपनाने विदेशी का बहिष्कार करने से नहीं मिली थी । आजकल शासक खुद अपने लिए सभी विदेशी वस्तुओं को पसंद करते हैं भारत की निर्मित चीज़ों की गुणवत्ता पर उनका भरोसा ही नहीं है । अंग्रेज़ी कंपनी की जगह शासक अपने देश की अपनी मनपसंद कंपनियों पर निर्भर होने को सभी कुछ ख़ास धनवान साहूकारों के हवाले करने लगे हैं । जनता द्वारा निर्वाचित शासक डमरू बजाने से अनगिनत रंग रूप वेशभूषा पहन कर अपना गुणगान करवाने पर धन संसाधन बर्बाद करते हैं । देश को 2047 में शानदार बनाने का झूठा ख़्वाब दिखलाते हैं जबकि उनको आज की हालत की समझ तक नहीं है , तमाम वादे प्रलोभन नाकाम साबित हुए हैं लेकिन शासक हैं कि अपनी भूल स्वीकार करने को तैयार ही हैं बल्कि खुद अपने मुंह मियां मिठू बनकर आत्ममुग्ध हैं ।
कभी कहते थे महात्मा गांधी मज़बूरी का नाम है लेकिन आधुनिक युग की सरकार को गांधी जी इक अनचाहा बोझ प्रतीत होते हैं इसलिए तमाम ढंग से गांधी शब्द को हटाने मिटाने की कोशिश की जाने लगी है । गांधी जी आपकी बात वैष्वण जन तो तेने रे कहिए जे पीर पराई जाने रे , पर दुःखे उपकार करे तो ये , मन अभिमान न आणे रे । आजकल कथनी और करनी विपरीत होती है , भाषण देश सेवा जनता का कल्याण करने के देते हैं आचरण में अहंकार और शोषण अत्याचार करने को प्रशासन ही नहीं सुशासन कहने लगे हैं । भ्रष्टाचारी और अपराधी खुद को महान और माननीय कहलाने लगे हैं सत्ताधारी अपराधियों को गले लगाने उनको बचाने लगे हैं । सत्य के साथ गांधी जी आपने प्रयोग किए थे झूठ लूट पर प्रयोग शोध किया जाने लगा है । हर रिश्वतखोर खुद को देशसेवक बताने लगा है ईमानदारी का अर्थ घूस खाकर काम करना बतलाने लगा है । गांधी जी आपको 78 साल पहले क़त्ल किया गया था मगर आजकल रोज़ आपको क़त्ल किया जाता है शासक समझ नहीं पा रहे कैसे आप मर कर भी मरते नहीं हैं । इस सवाल से परेशान हैं आधुनिक शासक , कौन गांधी , कैसा गांधी , किसका गांधी ।

1 टिप्पणी:
सही बात मजबूरी से मिटाने तक पर आ गए।
खुद लोकल....वोकल रट ते रहते हैं और चीज़े ब्रांडेड पहनते हैं जनता से अपील करते रहते हैं खुद को अमल करना नही
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