Thursday, 30 August 2012

सिसकियां ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

      सिसकियां ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

वो सुनता है
हमेशा
सभी की फ़रियाद
नहीं लौटा कभी कोई
दर से उसके खाली हाथ।

शोर बहुत था
उसकी बंदगी करने वालों का वहां
तभी शायद 
सुन पाया नहीं
आज ख़ुदा भी वहां
मेरी सिसकियों की आवाज़।  

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