Tuesday, 16 October 2012

मेरा संकल्प है ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

 मेरा संकल्प है ( कविता ) डॉ लोक सेतिया 

लेता हूं शपथ
बनाना है ऐसा समाज
जिसमें कोई अंतर कोई भेदभाव
न हो इंसानों में।

मिटाना है अंतर
छोटे और बड़े का
अमीर और गरीब का।

नहीं रहेगा
एक शासक न दूसरा शासित
कोई न हो भूखा
कहीं पर किसी भी दिन
न ही होगा कोई बेबस और लाचार
सभी को मिलेंगे
एक समान
जीने के सभी अधिकार।

रुकना नहीं है मुझे
चलते जाना है
उस दिशा में
जहां सब रहें सुख चैन से
करने को समाज के
उज्जवल भविष्य का निर्माण।

प्रतिदिन करता हूं
खुद से ये वादा
चाहे कुछ भी हो उसका अंजाम
टकराना है झूठ से
अन्याय से
अत्याचार करने वालों से
जनहित के लिए।

डरना नहीं कभी
सत्ता का दुरूपयोग करने वालों से
उठानी है अपनी आवाज़
भ्रष्टाचार के खिलाफ
जीवन के हर मोड़ पर
निभाना है संकल्प
मातृभूमि के प्रति
अपना दायित्व निभाने का।

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