भगवान की मर्ज़ी ( व्यंग्य - कथा ) डॉ लोक सेतिया
ख़लबली मची है धरती लोक में नहीं उस परलोक में जिस में रहते हैं भगवान और सभी देवता देवियां जिनको विधाता ने बनाया हुआ है दुनिया का कामकाज उसकी देखभाल और विधि का विधान चलाने की खातिर । विकट समस्या उतपन्न हो गई है जब भगवान ने घोषणा कर दी है कि वह अपने पदभार से निवृत हो रहे हैं । आपको अगर लगेगा कि तब उनकी जगह किसी और को ये अवसर मिलने वाला है तो आप कुछ भी नहीं जानते हैं जब देवी देवताओं को बनाने वाला भगवान खुद भगवान नहीं रहेगा तब अन्य सभी कुछ और बनना तो दूर जो बनाए गए हैं उस से भी वंचित होकर अपना अपना अस्तित्व खो बैठेंगे । नारद मुनि अकेले ऐसे हैं जो भगवान से बिना संकोच वार्तालाप कर सकते हैं , नारद जी बोले लगता है अपनी पत्नी संतान से कोई कहासुनी हुई है जिसकी सज़ा हम सभी देवी देवताओं से लेकर अपने प्रिय भक्तजनों को देने की बात कर रहे हैं । भगवान हमेशा हंसते थे नारद जी की बात से उनकी चिंता मिट जाया करती थी लेकिन आज भगवान के मुखमंडल पर हंसी नहीं गहरी उदासी दिखाई दे रही है । नारद जी समझ गए माजरा कुछ और है जो हमेशा की तरह किसी न किसी ढंग से उपाय करने से बात बन जाती रहती थी से गंभीर है । नारद जी बोले प्रभु अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें अन्यथा अनर्थ हो जाएगा आपके बगैर कोई भी कैसे रह पाएगा । भगवान कहने लगे मेरा निर्णय अंतिम है और बदल नहीं सकता है , आपको भी मेरे भरोसे नहीं रहना चाहिए खुद अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए । नारद जी ने कहा भगवन आप भी समझते हैं जानते हैं कि आप हम सभी को देवी देवता इंसान को आदमी औरत से लेकर कण कण को क्या से क्या बना सकते हैं । पेड़ पौधे पशु पक्षी जानवर कीड़े मकोड़े से पत्थर तक को कुछ भी बनाते हैं जल थल हवा सभी आपके आदेश से बनते हैं बिगड़ते हैं । कोई भी आपको कैसे बना सकता है ये कल्पना करना भी संभव नहीं है , अचानक प्रभु ने आखिरी इक करामात दिखलाई ताकि सभी को वास्तविक कारण समझाया जा सके ।
भारतभूमि पर कुछ लोग टीवी चैनल सोशल मीडिया से सभाओं में शहर शहर गांव गांव बस्ती बस्ती जगह जगह लगाए इश्तिहारों प्रचार प्रसार में साबित कर रहे नज़र आने लगे कि कोई आदमी भगवान से भी बढ़कर लोकप्रिय है । उसको बनाने वाली जनता उसको हटाने की बात सोच भी नहीं सकती है बोलना तो जैसे अक्षम्य अपराध है , जिस दल की सरकार है उस में सभी जानते हैं मानते हैं समझते हैं कि वही असली सरकार हैं उनके बगैर सभी सांसद सभी विधायक सभी मंत्री दल के सभी पदाधिकारी सदस्य कुछ भी नहीं हैं उनके खेल खिलौने हैं । कब किस का अस्तित्व ख़त्म हो जाये सिर्फ उनकी मर्ज़ी है , न्यायालय के न्यायधीश से चुनाव आयोग के आयुक्त तक हर ख़ास बड़े बड़े पद पर उनकी पसंद से लोग नियुक्त होते हैं कभी कोई पसंद का नहीं बन भी जाता है तो कुछ भी कर नहीं सकता अथवा त्यागपत्र देने की नौबत आ सकती है । जिनको शोर मचाना आता है उन्होंने अपना ईमान उनको बेच दिया है और अपना मालिक उनको समझ कर उनकी वंदना गुणगान कर बदले में मनवांछित वरदान पाते हैं । आजकल भारत देश में करोड़ों लोग उन्हीं के भक्त कहलाते हैं उनको हर बात पर सर झुकाते हैं उन जैसा कोई नहीं हुआ कोई दुनिया भर में नहीं है यही समझते हैं समझाते हैं । ऐसे भगवान ने अपने खास लोगों को क्या से क्या नहीं बना दिया है , लोग कभी नहीं देखते समझते उसने अपनी हसरत पूरी करने की चाहत में सब बना बनाया मिटा दिया है । अपना नाम हर जगह अंकित करवा खुद को अजर अमर बनवाने को हरा भरा गुलशन उजड़वा दिया है । उनके बनाये हुए भगवान रोज़ अपने रंग ढंग दिखलाते हैं सावन के अंधे भक्त हैं रात को दिन अंधेरे को उजाला बताते हैं । भगवान क्या कहना चाहते हैं सभी देवी देवताओं को समझ आ गया है असली भगवान से बढ़कर नकली भगवान दुनिया में छा गया है , भगवान भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं संख्याबल में किस के अनुआई साथ नहीं छोड़ते किस को छोड़ देते हैं आर्टिफीसियल इंटेलिजेन्स से इसका नतीजा सामने आ गया है । जब लोगों ने असली भगवान से बढ़कर इंसान को नकली भगवान बनाकर उसी पर भरोसा करना शुरू कर दिया है तब पहले के वास्तविक भगवान से रिश्ता बचा ही कहां है ।

1 टिप्पणी:
👌👍...देवताओ को समझ आ गया...असली भगवान...नकली ....छा गया.👌👍
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