मार्च 06, 2026

POST : 2065 ऐसी भी खताएं कर गए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

    ऐसी भी खताएं कर गए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' 

ऐसी भी खताएं कर गए  
हम जीने से पहले मर गए ।  
 
दुश्मनों के सितम सहते रहे 
देखा दोस्तों को तो डर गए ।
 
ढूंढते फिरे , यहां - वहां 
बुलाया उसने तो न उधर गए । 
  
पूछा जो हमसे हमारा पता 
जानते नहीं कह मुकर गए ।
 
लिखे थे ख़त हाले दिल के 
रह जेब में मगर गए ।   
 
बाद जाने के सोचा किए 
करना था क्या क्या कर गए । 
 
हम बढ़ा सके न कदम 
कुछ दूर से वो गुज़र गए ।  


 
( 16 मार्च 1996 डायरी से )  
 

 
 
 
 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Wahh बहुत खूब