Sunday, 16 September 2012

ग़ज़ल 8 6 ( पूछा उन्हें जाना किधर चाहते हैं )

पूछा उन्हें जाना किधर चाहते हैं ,
कहने लगे बनना खबर चाहते हैं !
जिस आशियां को बेच डाला कभी था ,
अब फिर वही प्यारा सा घर चाहते हैं !
इस शहर की करते शिकायत सभी से ,
आ कर यहीं रहना मगर चाहते हैं !
कुछ भी नहीं चाहा किसी से कभी भी ,
बस धूप  में कोई शजर चाहते हैं !      ( शजर ::: पेड़ )
मांगें जो मिल जाये वही ज़िंदगी से ,
सब लोग कुछ ऐसा हुनर चाहते हैं !
खोना पड़ेगा आपको कुछ तो पहले ,
पाना यहां सब कुछ अगर चाहते हैं !
मिलते ही जैसे पा लिया था सभी कुछ ,
"तनहा" वही पहला असर चाहते हैं !

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