Thursday, 25 October 2012

इश्क़ का हो इज़हार , बहुत मुश्किल है ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया

 इश्क़ का हो इज़हार , बहुत मुश्किल है ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया 

इश्क का हो इज़हार ,बहुत मुश्किल है
दुहरी इस की धार ,बहुत मुश्किल है।

जीत न पाया दिल के खेल में कोई
जीत के भी है हार ,बहुत मुश्किल है।

हो न अगर दीदार तो घबराये दिल
होने पर दीदार बहुत मुश्किल है।

इस को खेल न तुम बच्चों का जानो
दुनिया वालो प्यार बहुत मुश्किल है।

इश्क का दुश्मन है ये ज़माना लेकिन
कोई नहीं है यार ,बहुत मुश्किल है।

तूने किसी का दिल तोड़ा है बेदर्दी
टुकड़े हुए हैं हज़ार ,बहुत मुश्किल है।

प्यार तो अफसाना है एक नज़र का
होता है एक ही बार ,बहुत मुश्किल है।

देर से आने की है उनकी आदत
हम हैं इधर बेज़ार ,बहुत मुश्किल है।

कहते हैं वो तुम बिन मर जाएंगे
जां देना ,सरकार ,बहुत मुश्किल है।

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