Wednesday, 28 November 2012

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है
ये भी शिकवा कुछ अदीबों का है।

मिल रहा सब कुछ अमीरों को क्यों
हक बराबर का गरीबों का है।

मांगकर मिलता नहीं छीनो अब 
फिर सभी अपने  नसीबों का है।

किसलिये  डरना किसी ज़ालिम से 
डर नहीं कोई सलीबों का है।

दर्द गैरों का दिया कुछ "तनहा"
और कुछ अपने हबीबों का है।

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