नवंबर 19, 2012

POST : 239 जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

 जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं ( ग़ज़ल )

                         डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं 
जो थे इन्सान जाने कहां रह रहे हैं ।
 
लोग चुप हैं मगर , ख़ामोशी बोलती है  
सिल चुकी हर जुबां हम जहां रह रहे हैं ।
 
फिर से जाना है वापस हमें उस गली में  
यार सारे अभी तक  वहां रह रहे हैं ।
 
पूछते लोग मिल कर नहीं साथ रहते
तुम सभी को बता दो कि हां रह रहे हैं ।
 
हमको जन्नत की चाहत न दोजख़ से डरते  
हमसे बेहतर हैं अहले - जहां रह रहे हैं ।
 
खो गए आप , सब लोग कहने लगे हैं  
किसलिए आप होकर निहां रह रहे हैं ।

प्यार करना नहीं जुर्म कोई है ' तनहा ' 
लोग नाहक  झुकाए ,  दहां रह रहे हैं ।
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

अहा...बहुत अच्छे शेर