Friday, 16 November 2012

बतायें तुम्हें क्या किया हमने ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बतायें तुम्हें क्या किया हमने ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बतायें तुम्हें क्या किया हमने
ज़माने को ठुकरा दिया हमने।

बुझी प्यास अपनी उम्र भर की
कोई जाम ऐसा पिया हमने।

तुझे भूल जाने की कोशिश में
तेरा नाम हर पल लिया हमने।

नहीं दुश्मनों से गिला करते
उन्हें कह दिया शुक्रिया हमने।

पुरानी ग़ज़ल को संवारा है
बदल कर नया काफिया हमने।

गुज़ारी है लम्बी उम्र लेकिन
नहीं एक लम्हा जिया हमने।

रहा अब नहीं दाग़ तक "तनहा"
तेरा ज़ख्म ऐसे सिया हमने।

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