Wednesday, 21 November 2012

अमर कहानी ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

अमर कहानी ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

बेहद कठिन है
लिखना
जीवन की कहानी
नहीं आसान होता
समझना
जीवन को
करते हैं 
प्रतिदिन संग्राम
जीने के लिये 
कथाकार की
कल्पना जैसा
होता नहीं
कभी किसी का
जीवन वास्तव में।

बदलती रहती
पल पल परिस्थिति
मिलना बिछुड़ना
हारना जीतना
सुख दुःख जीवन में
नहीं सब होता
किसी के भी बस में
कदम कदम विवशता 
आती है नज़र
सब कुछ घटता जीवन में
देख नहीं पाता कोई भी
अनदेखा
अनसुना भी
रह जाता
बहुत कुछ है
जीत जाता हारने वाला
और जीतने वाले
की हो जाती हार
अक्सर जाती यहां बदल
उचित अनुचित की परिभाषा
किसे मालूम क्या है
पूर्ण सत्य जीवन का।
 
कैसे तय कर सकती है
किसी कथाकार की कलम
नायक कौन
कौन खलनायक
जीवन में
कहां बच पाता लेखक भी
अपने पात्रों के मोह से
निष्पक्ष हो
समझना होगा
जीवन के पात्रों को
निभाना होगा
कर्तव्य उसे
जीवन की कहानी के
सभी पात्रों से 
न्याय करने का
उसकी कलम
लिख पाएगी तभी 
कोई कालजयी कहानी
जो अमर बनी 
रहेगी युगों युगों तक। 

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