Monday, 12 November 2012

इसी जहां में सभी का जहान होता है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

       इसी जहां में सभी का जहान होता है ( ग़ज़ल ) 

                        डॉ लोक सेतिया "तनहा"

इसी जहां में सभी का जहान होता है
नई ज़मीन नया आसमान होता है।

वही ज़माना फिर आ गया कहीं वापस
कभी कभी तो हमें यूं गुमान होता है।

लिखा हुआ तो बहुत है किताब में लेकिन
अमल जो कर के दिखाए महान होता है।

वहीं मसल के किसी ने हैं फेंक दी कलियां
जहां सजा के रखा फूलदान होता है।

जो दर्द लेकर खुशियां सभी को देता हो
वो आदमी खुद गीता कुरान होता है।

चलो तुम्हें हम घर गांव में दिखा देंगे
यहां शहर में तो केवल मकान होता है।

नया परिंदा आकाश में लगा उड़ने
ये देखता "तनहा" खुद उड़ान होता है।

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