मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।
नवंबर 25, 2021
POST : 1554 दिल-औ दिमाग़ के जाले साफ़ कर ( आत्मचिंतन ) डॉ लोक सेतिया
नवंबर 23, 2021
POST : 1553 धर्म ईश्वर धार्मिक स्थलों का रहस्य ( चिंतन-मनन ) डॉ लोक सेतिया
धर्म ईश्वर धार्मिक स्थलों का रहस्य ( चिंतन-मनन ) डॉ लोक सेतिया
नवंबर 19, 2021
POST : 1552 मैं कतरा हो के भी तूफ़ां से जंग लेता हूं ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया
मैं कतरा हो के भी तूफ़ां से जंग लेता हूं ( हास-परिहास )
डॉ लोक सेतिया
नवंबर 10, 2021
POST : 1551 ज़िंदगी जीने का सलीका यही है ( गीता सिंह गौड़ --- केबीसी ) डॉ लोक सेतिया
ज़िंदगी जीने का सलीका यही है ( गीता सिंह गौड़ ) डॉ लोक सेतिया

नवंबर 07, 2021
POST : 1550 राज़ खुला ज़िंदगी बिता कर ( व्यंग्य-कथा ) डॉ लोक सेतिया
राज़ खुला ज़िंदगी बिता कर ( व्यंग्य-कथा ) डॉ लोक सेतिया

अक्टूबर 27, 2021
POST : 1549 दुरूपयोग करना सीखा है ( पागलपन ) डॉ लोक सेतिया
दुरूपयोग करना सीखा है ( पागलपन ) डॉ लोक सेतिया
अक्टूबर 22, 2021
POST : 1548 अंधेरे दिन रौशन रात ( अनसुलझे सवालात ) डॉ लोक सेतिया
अंधेरे दिन रौशन रात ( अनसुलझे सवालात ) डॉ लोक सेतिया
अक्टूबर 16, 2021
POST : 1547 हाथ जोड़कर कोरोना खड़ा ( अंतिम अध्याय ) डॉ लोक सेतिया
हाथ जोड़कर कोरोना खड़ा ( अंतिम अध्याय ) डॉ लोक सेतिया
अक्टूबर 13, 2021
POST : 1546 खेल-तमाशा बना लिया मकसद { भटकते मुसाफ़िर } डॉ लोक सेतिया
खेल-तमाशा बना लिया मकसद { भटकते मुसाफ़िर } डॉ लोक सेतिया
अक्टूबर 11, 2021
POST : 1545 झूठ के गुणगान का शोर है ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया
झूठ के गुणगान का शोर है ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया
झूठ को सच करे हुए हैं लोग , बेज़ुबां कुछ डरे हुए हैं लोग।
फिर वही सिलसिला हो गया , झूठ सच से बड़ा हो गया।
वो जो कहते थे हमको कि सच बोलिये , झूठ के साथ वो लोग खुद हो लिये।
सच कोई किसी को बताता नहीं , यह लोगों को वैसे भी भाता नहीं।
आई हमको न जीने की कोई अदा , हमने पाई है सच बोलने की सज़ा।
उसको सच बोलने की कोई सज़ा हो तजवीज़ , लोक राजा को वो कहता है निपट नंगा है।
झूठ यहां अनमोल है सच का न व्यौपार , सोना बन बिकता यहां पीतल बीच बाज़ार।

अक्टूबर 04, 2021
POST : 1544 मर गया , खाते पर लिख दिया { सबक चाचा चाय वाला } डॉ लोक सेतिया
मर गया , खाते पर लिख दिया { सबक चाचा चाय वाला }
डॉ लोक सेतिया
बड़े लोग ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया
बड़े लोग बड़े छोटे होते हैं
कहते हैं कुछ
समझ आता है और
आ मत जाना
इनकी बातों में
मतलब इनके बड़े खोटे होते हैं।
इन्हें पहचान लो
ठीक से आज
कल तुम्हें ये
नहीं पहचानेंगे
किधर जाएं ये
खबर क्या है
बिन पैंदे के ये लोटे होते हैं।
दुश्मनी से
बुरी दोस्ती इनकी
आ गए हैं
तो खुदा खैर करे
ये वो हैं जो
क़त्ल करने के बाद
कब्र पे आ के रोते होते हैं।
अक्टूबर 01, 2021
POST : 1543 ग़रीब भगवान भरोसे , रईस सरकार भरोसे ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया
ग़रीब भगवान भरोसे , रईस सरकार भरोसे ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 28, 2021
POST : 1542 गरीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक ( खरी खरी ) डॉ लोक सेतिया
गरीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक ( खरी खरी ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 26, 2021
POST : 1541 स्वर्ग-नर्क मोक्ष और पितृपक्ष ( सत्य की खोज ) डॉ लोक सेतिया
स्वर्ग - नर्क मोक्ष और पितृपक्ष ( सत्य की खोज ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 22, 2021
POST : 1540 गठबंधन सरकार से विवाह संबंध तक ( हंसते - हंसाते ) डॉ लोक सेतिया
गठबंधन सरकार से विवाह संबंध तक ( हंसते - हंसाते ) डॉ लोक सेतिया

सितंबर 21, 2021
POST : 1539 दुनिया की सबसे बड़ी दौलत ( बेटी का प्यार-विश्वास ) डॉ लोक सेतिया
दुनिया की सबसे बड़ी दौलत ( बेटी का प्यार-विश्वास ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 14, 2021
POST : 1538 भटक रही अजनबी राहों में ( हिंदी की बात ) डॉ लोक सेतिया
भटक रही अजनबी राहों में ( हिंदी की बात ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 11, 2021
POST : 1537 रौशन सितारों के घने अंधेरे ( पीतल की चमक ) डॉ लोक सेतिया
रौशन सितारों के घने अंधेरे ( पीतल की चमक ) डॉ लोक सेतिया
रौशनी से जो मकां भरा-भरा लगा , तुम कहो कुछ भी मुझे वो मकबरा लगा।
जब मिला नादान तो रोता हुआ मिला , बज़्म में देखा उसे वो मसखरा लगा।
सितंबर 09, 2021
POST : 1536 ओ नादान तू बन जा भगवान ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया
ओ नादान तू बन जा भगवान ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 07, 2021
POST : 1535 समंदरों की गाथा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया
समंदरों की गाथा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया
सितंबर 05, 2021
POST : 1534 बेअसर आंसू-आहें अनसुनी फ़रियाद ( पढ़ना-लिखना ) डॉ लोक सेतिया
बेअसर आंसू-आहें अनसुनी फ़रियाद ( पढ़ना-लिखना ) डॉ लोक सेतिया
फुर्सत नहीं ( लघुकथा ) डॉ लोक सेतिया
बचपन के दोस्त भूल गये थे महानगर में रहते हुए। कभी अगर पुराने मित्र का फोन आ जाता तो हर बार व्यस्त हूं , बाद में बात करना कह कर टाल दिया करते। कहां बड़े शहर के नये दोस्तों के साथ मौज मस्ती , हंसना हंसाना और कहां छोटे शहर के दोस्त की वही पुरानी बातें , बोर करती हैं। लेकिन जिस दिन एक घटना ने बाहर भीतर से तोड़ डाला तब यहां कोई न था जो अपना बन कर बात सुनता और समझता।महानगर के सभी दोस्त कहां खो गये पता ही नहीं चला। तब याद आया बचपन का पुराना वही दोस्त। फोन किया पहली बार खुद उसे अपने दिल का दर्द बांटने के लिये। तब मालूम हुआ कि वो कब का इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। पिछली बार जब उसका फोन आने पर व्यस्त हूं कहा था तब उसने जो कहे थे वो शब्द याद आ गये आज। बहुत उदास हो कर तब उसने इतनी ही बात कही थी ,
" दोस्त शायद जब कभी तुम्हें फुर्सत मिले हमारे लिये तब हम ज़िंदा ही न रहें "।
तब सच्चे मित्र को नहीं पहचाना न ही उसकी भावना को समझा , उसका हाल पूछा न उसका दर्द बांटना चाहा तो अब उसको याद कर के आंसू बहाने से क्या हासिल।










