अगस्त 12, 2026

POST : 2106 सितम सरकार हम पर रोज़ ढा रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

  सितम सरकार हम पर रोज़ ढा रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  

सितम सरकार हम पर रोज़ ढा रहे हैं  
कहानी ज़ालिमों की , दोहरा रहे हैं ।  
 
है जिन के हाथ में , इंसाफ़ का तराज़ू 
वही कानून के , पुर्ज़े उड़ा रहे हैं ।  
 
बुरा था वक़्त जब तब दूर हो गए थे 
नये हालात में , खुद पास आ रहे हैं ।
 
सुना तो रूह तक भी कांपने लगी है 
न जाने , लोग कैसे गीत गा रहे हैं ।   
 
उन्हीं के सामने क्यों हाथ जोड़ते हो 
तुम्हारी बस्तियों को जो जला रहे हैं । 
 
न जाने क़त्ल किसका रोज़ हो रहा है 
चली है , ख़ून की आंधी दिखा रहे हैं ।
 
सियासत देख उनकी कह रहे हैं ' तनहा '
इशारे आपके  ,  सबको डरा रहे हैं । 
 

  

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