सितंबर 16, 2026

POST : 2118 प्यास को हर जगह पानी लिखिंगे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

    प्यास को हर जगह पानी लिखिंगे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  

प्यास को हर जगह पानी लिखेंगे
हम अगर अपनी कहानी लिखेंगे । 
 
उम्र भर जो दर्द देते रहे हैं 
शुक्रिया लिख मेहरबानी लिखेंगे ।  
 
कोशिशें की भूल पाए न लेकिन 
फिर सभी बातें पुरानी लिखेंगे । 
 
कश्तियों को जो डुबोती हैं हर दिन 
रोज़ लहरों की रवानी लिखेंगे । 
 
क्या कहें कैसा नया दौर लगता 
राह से भटकी जवानी लिखेंगे । 
 
अश्क़ अपने सूख कब से गए हैं 
ख़ुश्क आंखों की ज़ुबानी लिखेंगे । 
 
लिख रहे ' तनहा ' नहीं लोग समझे 
एक दिन वो ख़ुद ही म'आनी लिखेंगे ।   
 

 
 
  

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