जो हक़ीक़त को छुपा देते हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया
जो हक़ीक़त को छुपा देते हैं
झूठ को सच भी बना देते हैं ।
बात क्या उनको बताई जाए
राज़ ग़ैरों को बता देते हैं ।
बात करते हैं अदावत की वो
दोस्ती का यूं सिला देते हैं ।
जो न पहुंचाए कभी मंज़िल तक
रास्ता ऐसा दिखा देते हैं ।
लोग करते हैं सियासत हर दम
जलते शोलों को हवा देते हैं ।
ज़हर हाथों से पिला कर हमको
लोग जीने की दुआ देते हैं ।
ख़ुद गए जो छोड़ कर ' तनहा ' को
बेवफ़ाई का गिला देते हैं ।

1 टिप्पणी:
बढ़िया शेर सभी👌👍
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