अगस्त 22, 2026

POST : 2113 जो हक़ीक़त को छुपा देते हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

       जो हक़ीक़त को छुपा देते हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  

जो हक़ीक़त को छुपा देते हैं 
झूठ को सच भी बना देते हैं । 
 
बात क्या उनको बताई जाए 
राज़ ग़ैरों को बता देते हैं ।  
 
बात करते हैं अदावत की वो  
दोस्ती का यूं सिला देते हैं ।  
 
जो न पहुंचाए कभी मंज़िल तक 
रास्ता ऐसा दिखा देते हैं । 
 
लोग करते हैं सियासत हर दम 
जलते शोलों को हवा देते हैं । 
 
ज़हर हाथों से पिला कर हमको  
लोग  जीने की दुआ देते हैं ।  
 
ख़ुद गए जो छोड़ कर ' तनहा ' को 
बेवफ़ाई का गिला देते हैं ।  
 
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

बढ़िया शेर सभी👌👍