इस देश को तुमने बहुत बर्बाद किया है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया
इस देश को तुमने बहुत बर्बाद किया है
हैं कौन जिनको आपने आबाद किया है ।
समझा तुम्हें था दोस्त तुम दुश्मन हो सभी के
इंसाफ कैसा आपने ईजाद किया है ।
जो बात सबको याद है तुम भूल गए हो
तुमको पता है क्या कहां इरशाद किया है ।
बन कर सभी का चारागर बस ज़हर पिलाया
हर रोज़ ऐसा आपने उन्माद किया है ।
अर्थी शहीदों की पे कितने फूल चढ़ाए
होता यही हर बार कुछ अपवाद किया है ।
ताउम्र सबको आपने जो अश्क़ दिए हैं
उसका असर है जो तुम्हें नाशाद किया है ।
की क्या ख़ता कोई कभी ' तनहा ' ने बताओ
कुछ तो कहो उसने कभी प्रमाद किया है ।
