अगस्त 06, 2026

POST : 2102 इतिहास मिटाना कथाएं बनाना ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

       इतिहास मिटाना कथाएं बनाना  ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया  

इतिहास का विषय सभी को समझ नहीं आता है कुछ लोग मानते हैं वर्तमान में पुरातन इतिहास को याद रखना खुद ही मुसीबत को बुलाना है । उन्होंने पुरातन इतिहास को कभी हक़ीक़त माना ही नहीं उनके लिए कपोल काल्पनिक कथाएं कहानियां भले झूठी साबित हों लगती शानदार हैं । आधुनिक कालीन वास्तविक समाज की कड़वी सच्चाई उनको देखना पसंद नहीं है उस से नज़रें चुराते हैं ऐसे में उनकी समस्या और गंभीर बन जाती है दुनिया को क्या दिखाया जाए । सबसे पहले इक ऊंची दीवार खड़ी की जाती है जिस के पीछे पुरातन इतिहास दिखाई ही नहीं दे मगर कोशिश कर के भी उस पुराने इतिहास की निशानियों को मिटाने में सफल नहीं होने पर उस पर कालिख़ पोतने की बात करते हैं । सिर्फ इक इसी मकसद पर ध्यान रखने से कुछ  नया आधुनिक युग का इतिहास रचने को कुछ भी किया ही नहीं जाता है । सृजन करना नहीं जानते , जानते हैं केवल निर्मित को ढहाना या फिर उनको अपना बनाया घोषित करने का कार्य करना । किताबों से मिटाने से कभी इतिहास की निशानियां मिट सकती हैं न ही उनके पिछले कर्मों पर पर्दा डाला जा सकता है । इतिहास से घबराते हैं मगर खुद उन्हीं का इतिहास उनके सामने खड़ा हो जाता है अपने अतीत से शर्मसार नहीं जो उनका भविष्य सुधरता नहीं है । लेकिन उनको अपनी ज़िद छोड़नी नहीं है उन बातों पर गर्व करते हैं जो गौरवशाली कहला नहीं सकती हैं । 
 
देश की समस्याओं को जानना समझना उनको ऐसे व्यर्थ कार्यों पर चिंता करना फ़ज़ूल लगता है । भूख बेरोज़गारी शिक्षा स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता नहीं है उनकी चिंता अपनी विचारधारा को जैसे भी मुमकिन हो थोपना है कोई आदर्श कोई नैतिकता कोई संविधान उनके रास्ते में अड़चन नहीं बन सकता है । जनता की खुशहाली उनकी चाहत नहीं हैं उनको केवल खुद अपने लिए नाम शोहरत से लेकर शानदार रहन सहन मौज मस्ती चाहिए जनता की आहें उसकी वेदना से उनको कोई मतलब नहीं है । जनता होना उसका भाग्य है कमनसीबी है शासक होना खुशनसीबी है शासक बनकर भी जो गरीबी को लेकर विचलित हो उस से नासमझ कौन होगा । चुनाव जीतना लाज़मी है मगर उस के लिए देश जनता की भलाई की बात पर चिंतन करना ज़रूरी नहीं है । चुनाव जीतने को साम दाम दंड भेद सभी आज़मा कर भी बात नहीं बने तो हर सीमा को लांघना जानते हैं खुद को नियम कानून क्या देश भगवान से भी बड़ा मानते हैं । जनता को हर तरफ उजियारा दिखाई दे इतनी चमक दमक उनको दिखलाना आता है । चलाचौंध रौशनी में जो देखने लायक नहीं है अन्याय अत्याचार ज़ुल्म दहशत सभी छुपाया जाता है बस इक यही करिश्मा उनको खूब आता है , सच आलोचना उनको कब भाता है अपना गुणगान चाटुकारिता उनको सातवें आसमान पर बिठाता है । ऊंची ऊंची उड़ान भरना उनके मन को लुभाता है कौन किस लिए अपने घर बुलाता है उनको घर लुटवा कर भी बड़ा मज़ा आता है उनका अपना अलग इक बही खाता है जिस में उनका पलड़ा हमेशा झुकता जाता है । मीडिया उनका खरीदा हुआ गुलाम है उनके सुर में सुर मिलाता है हर समय गंदर्भ राग सुनाकर सत्ता का मन बहलाता है । 
 
सरकार ने लिखने वाले को घर नहीं दफ़्तर नहीं किसी और एकांत जगह बुलवाया है जिस जगह इक दरबार गया सजाया है सभी को नचवाया है समूहगान गाया है सब सिर्फ सत्ता की माया है । हर पंछी को दाना खिलाया है सोने का पिंजरा हर किसी को बहुत भाया है । लिखने वाले को गया समझाया है हमने झूठ को सच से बड़ा बनवाया है खाली हाथ लोग आते हैं झोलियां भर भर लौट जाते हैं रात दिन उनकी महिमा सुनते सुनाते हैं भवसागर से पार उतर जाते हैं । लिखने वाले ने सवाल किया है क्या आपका इतिहास स्वर्णिम है जिस को लिखवाना है आपके दरबार में सभी लोग अंधे हैं और अंधों में काना है जो वही राजा है । हंसी हर तरफ गूंजने लगी है आपको कोई इतिहास नहीं लिखना है कोई चिल्लाया है आपको कथा लिखनी है भजन लिखना है सभी को सुनाना है आधी हक़ीक़त है आधा अफ़साना है । कथा में जिसको पूज्य बनाते हैं उसकी नाकामियों गलतियों को भी सुंदर तरीके से लिखते हैं समझाते हैं । उसके अवगुण भी सही साबित किये जाते हैं कितने कारण बताकर उसकी ख़राबी को कमाल किया कहते हैं आसमान पर भगवान इंसान धरती पर रहते हैं । सत्ता का उनका आसमान ऊंचा है हर किरदार जिस से छोटा बौना है बहुत नीचा है ईश्वर बनाना होता है जिसे उसकी कथनी करनी पर आचरण पर शंका सवाल नहीं किया जाता है बिना ऐसा समझे किसी को मालामाल नहीं किया जाता है ।  पुरानी कथाओं से किरदार चुनकर नई आधुनिक युग की कलयुगी रामायण लिखवाई जाएगी , सीता जनता है आखिर किसी धरती में समाएगी , चैन से कभी नहीं जी पाएगी ।
 
 

 


    

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