अगस्त 08, 2026

POST : 2104 इस बार सोचना पड़ेगा ( व्यंग्य - कथा ) डॉ लोक सेतिया

  इस बार सोचना पड़ेगा  ( व्यंग्य - कथा ) डॉ लोक सेतिया 

अर्थात अब तक केबीसी और जनाब अमिताभ बच्चन जी ने सोचा ही नहीं था , जिस शो को धन ज्ञान से लेकर जाने कितने तरह का भंडार समझ रहे थे , वास्तव में वो क्या था सोचने की घड़ी आ गई है ।  सोचने को बहुत कुछ है मगर अधिकांश लोग सोचने समझने की ज़हमत उठाते ही नहीं जो मन चाहा , जो फ़ायदे का सौदा दिखाई दिया , बिना संकोच करते जाते हैं ।  इस बार सोचना होगा कि वास्तव में केवल केबीसी ही नहीं अन्य तमाम टेलीविज़न शो फ़िल्में सीरियल से समाज को हासिल क्या होता है ।  कला साहित्य और टीवी सिनेमा का कर्तव्य समाज को सही मार्ग दिखलाना वास्तविकता से परिचित करवाना और समस्याओं का समाधान तलाश करना था ।  लेकिन ये सभी दर्शकों को घटिया मनोरंजन और झूठी चमक दमक से प्रवाभित कर ऐसी किसी मृगतृष्णा का शिकार कर रहे हैं जिस का परिणाम भागते दौड़ते प्यासे मर जाना है । उनका कहना है गंदा है पर धंधा है और धंधे का कोई धर्म नहीं होता , अर्थात पैसा मिलता है तो कुछ भी कर सकते हैं । राजनीति और वैश्यावृति दो पेशे हमेशा समझे जाते थे जिन में समानताएं हैं सब बिकाऊ है शरीर से आत्मा ज़मीर से तकदीर तक बस कीमत दाम घटते बढ़ते रहते हैं समय समय की बात है अधिक विस्तार की ज़रूरत नहीं समझदार हैं लोग इतने से समझ जाएंगे ।  केबीसी वाले क्या सोचेंगे क्या फ़रमायेंगे या हमेशा की तरह दर्शकों को उलझाएंगे तालियां बजवा अपनी तिजोरी भरवाएंगे ।  सोचना होगा मिल बैठे हैं दो और अभिनेता भी चले थे किस मकसद को लेकर पहुंच गए हैं जिस में मकसद की कोई बात नहीं होती , नायक का किरादर निभाते निभाते ख़लनायक को और ऊंचाई पर लेकर खड़ा करते हैं । 
 
हर बार स्लोगन बदलते हैं जैसे पुरानी चीज़ पर नया चमकदार लेबल लगाया जाता है मगर भीतर कुछ भी नहीं होता वही खोखलापन जो शोर मचाता है । कॉकरोच शब्द से भी समझ आया होगा आपको भी समाज सरकार दुनिया की तरह किसी की ज़ुबान से निकला एक शब्द कितना बड़ा तूफ़ान कोई बवंडर खड़ा कर सकता है ।  आपकी मशहूरी भी जाने कब पर्वत की ऊंचाई से नीचे धरती पर ला खड़ा करे आपको भी सोचना पड़ेगा , जब विश्व भर में कितना प्रयास प्रचार प्रसार कितना पैसा खर्च कर अर्जित शोहरत इक झटके में किसी को ज़मीन पर ला पटकती है तब आपकी क्या हैसियत है आखिर तो पर्दे पर काल्पनिक किरादर ही हैं कोई असली जीवन में आदर्श और मूल्यों पर चलने वाले असली नायक नहीं हैं जैसे नेहरू गांधी सुभाष या फिर जिनका जन्म दिन वही है जो आपका है लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ।  कोई पद नहीं चाहा स्वीकार किया कुछ धन दौलत नहीं जमा की आपकी तरह से फिर भी इतिहास में उनके सामने आप क्या बड़े से बड़े राजनेता बेहद बौने लगते हैं । केबीसी खेल है मनोरंजन है या फिर जुआ है बदले ढके छुपे ढंग से जिस का नशा हर रोज़ कितने लोगों को बर्बाद करता है ये सबक सिखला कर कि महनत काबलियत से बढ़कर तकदीर का दांव खेलना आसान रास्ता है ।  इस बार इस बात को भी सोचना क्या देश समाज को आपने दिया है अपने फ़िल्मी किरादरों से लेकर विज्ञापनों तक से सिर्फ पैसा कमाना कोई महान कार्य नहीं होता है । इक खबर से लोग हैरान नहीं हुए जब पता चला कि किसी की तांबे की बनाई गई मूर्ति बरसात में धुलने से भीतर सीमेंट की निकली बल्कि उसके भी अंदर मुमकिन है कुछ खोखलापन ही मिले या कुछ मलबा जैसा सामान भरा हो । बड़े बड़े किरदार बाहर से सोने जैसे चमकते होते हैं अंदर कितना कुछ सड़ांध सा छुपा रहता है । 
 
शायद अभी भी हम सभी को भी सोचना चाहिए हमको कैसा देश कैसा समाज बनाना है । क्या सिर्फ आधुनिक सुख सुविधाएं साधन संसाधन महत्वपूर्ण हैं या उनसे बड़ी बात होती है सच्चाई ईमानदारी और समाजिक एकता समानता न कि येन केन प्रकरण कुछ भी हासिल करना ।  हमारा चरित्र क्या है कथनी अलग होती है करनी विपरीत होती है अपने चेहरे पर कितने मुखौटे लगाए हुए हैं सोचना ही पड़ेगा ।  मगर इस बार सोचने की आवश्यकता का असली कारण और है ए आई अर्थात नकली होशियारी  (   artificial intelligence ) को केबीसी में शामिल करना । भाग लेने वालों को सलाह दी जा रही है Google gemini से सीखें , आपको उलझन नहीं हो इसलिए बताना है कि नकली होशियारी इक ऐसा पागलपन है जिसने दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाना सिखा दिया है । सरकार से लेकर सॉफ्टवेयर उद्योग तक इसके मोहजाल में उलझे हुए हैं । आपने राजा नंगा है कहानी पढ़ी सुनी होगी , उस में राजा को सबसे खूबसूरत लिबास पहनने की चाहत होती है । शायद सभी को देख कर शहंशाह को भी ऐसा पहनावा आज़माने की धुन सवार हुई हो , उस कहानी की तरह ए आई का भी कोई वास्तविक अस्तित्व है नहीं केवल इक भ्रमजाल है ।  इसलिए शो आयोजक को सावधानी बरतनी होगी कि दर्शकों में कोई मासूम बच्चा कहीं राज़ नहीं खोल दे कि किसी ने कुछ भी नहीं पहना है पोशाक दिखाई नहीं दे रही है ।     
 

 

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