अगस्त 20, 2026

POST : 2112 सच का आईना दिखाऊंगा ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

     सच का आईना दिखाऊंगा ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  

सच बोलने की सज़ा ये पाऊंगा 
बेख़ता ही मार दिया मैं जाऊंगा । 
 
होगी न कभी खामोश मेरी ज़ुबान 
होगा जब ज़ुल्म आवाज़ उठाऊंगा । 
 
कर रहे  क़त्ल जम्हूरियत का सभी 
ये हक़ीक़त लोगों को मैं बतलाऊंगा । 
 
नाम पर सच बिकता है झूठ यहां  
तस्वीर इक रोज़  उसकी बनाऊंगा । 
 
चिराग़ कोई आप भी जलाते रहना
इक दिन मैं चला आखिर जाऊंगा । 
 
क़र्ज़ चुकाना सब शहीदों का बाकी है 
शीश फूलों की जगह पर चढ़ाऊंगा ।
 
वतन की मिट्टी में मिलना है मुझे 
बन के राख धरती पे बिखर जाऊंगा ।  
 
जनता को मिल जाएंगे अधिकार जब  
गीत वही तब मैं भी संग गुनगुनाउंगा । 
 
लोग गूंगे बहरे हैं नहीं सुनते यहां पर 
मैं उन्हें  सच का ये आईना दिखाऊंगा ।    
 

   

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