अक्टूबर 29, 2023

POST : 1730 फिर नहीं लौटते हैं जाने वाले ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

      फिर नहीं लौटते हैं जाने वाले ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया 

फिर नहीं लौटते हैं जाने वाले 
याद आते बहुत भुलाने वाले । 
 
दोस्त कोई कभी कहीं पर मिलता  
फिर सताते हमें ज़माने वाले । 
 
बेवफ़ा से वफ़ा निभाई हमने 
हम से रूठे सभी मनाने वाले । 
 
लोग जिन पर यकीन करते पूरा 
झूठ को वो थे सच बताने वाले । 
 
उनकी बातें हसीन लगती सबको 
जुगनुओं को शमां बनाने वाले । 
 
दौलतों का नशा चढ़ा कुछ ऐसा 
सो गए कौम को जगाने वाले । 
 
याद ' तनहा ' हमें सभी वादें हैं 
दर्दो-आवाम के  मिटाने वाले ।