Friday, 8 May 2020

जहां जानलेवा रोग से बचाने वाले ईश्वर खुदा जीसस वाहेगुरु हों ( लगे भली या लगे बुरी ) डॉ लोक सेतिया

  जहां जानलेवा रोग से बचाने वाले ईश्वर खुदा जीसस वाहेगुरु हों 

                     ( लगे भली या लगे बुरी ) डॉ लोक सेतिया  

   आप जिस किसी पर आस्था रखते हैं उसी नाम से पढ़ना शुरू करें ताकि आपको भरोसा हो कि बात नास्तिकता की कदापि नहीं है। जब हम तमाम जगह नियम कानून बनाते हैं देश की जनता की सुरक्षा और तंदरुस्त और निर्भय होकर रहने को ध्यान में रख कर और चाहे कोई दवा हो खाने पीने का सामान या कोई भी यातायात का वाहन से सुविधाओं की चीज़ों तक इस का सबसे पहले जांचा परखा जाता है कि उनके उपयोग से कोई खराबी इंसान या हवा पानी कुदरत को नहीं हो सके। ऐसे में सरकार ने कड़े नियम बनाकर सराहनीय कदम उठाया है कि वही अस्पताल नर्सिंग होम खुल सकते हैं जिन में उपचार और रोग के फैलने से बचाव का हर ज़रूरी उपाय किया गया हो। जैसा कि कोरोना के फैलने के डर से सभी ऐसे धार्मिक स्थलों को बंद किया गया था क्योंकि इस में कोई शंका नहीं थी कि उस जगह जो कोई भी है वो अपने पास आने वाले श्र्द्धालुओं को बचाने का काम नहीं कर सकता है। अगर किसी ने ऐसा कुछ भी कहा है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसको पकड़ने की कोशिश की गई है। इसी से ये साबित होता है कि सरकार बेशक धर्म को आदर देती है सभी के और धर्मनिरपेक्षता की भी पैरोकार है मगर जब बात लोगों की ज़िंदगी और मौत की है तो विश्वास को नहीं वैज्ञानिक विचार और सोच को महत्व देना उसका फ़र्ज़ भी और राजधर्म भी बन जाता है। 

जितने भी बड़े बड़े भवन बनते हैं और जहां सैंकड़ों हज़ारों या लाखों लोग आ सकते हैं उन को बनाते समय मॉल पीवीआर या ऊंची इमारतों में तमाम तरह के सुरक्षा के कड़े नियम भी होते हैं और साथ में कोई अनहोनी होने पर बनाने वाले मालिक या संचालक की ज़िम्मेदारी भी दंड भी आर्थिक मुआवज़ा भी भरने का कानून होता है। इतना ही नहीं जिन जिन जगहों पर दुर्घटना होने की संभावना होती है सरकारी विभाग या निजी उद्योग चेतावनी भी लिखवाते हैं। पिछले कई हदीसे जिन में गैस रिसाव हुआ या सिनेमा में आग लगने से किसी स्कूल में पंडाल में आग लगने से कितनी जान किसी की लापरवाही से गई भविष्य में नहीं हो ये ध्यान रखते हुए सख्ती से नियम कानून का पालन करवाना ज़रूरी समझा गया। 

अब कोरोना को देख कर हमें विचार करना चाहिए क्या क्या धार्मिक स्थलों के लिए नियम कानून निर्धारित करने चाहिएं ताकि वहां जाकर कोई आशीर्वाद की जगह मुसीबत नहीं खरीद लाये। जैसा डॉक्टर्स को जिन के पास अल्ट्रासाउंड मशीन होती है ये लिखना पड़ता है कि यहां कोई जांच जो गैर कानूनी है नहीं की जाती है। ऐसे ही ये बताया जाये कि उस जगह कोई भी रोग नहीं फैले इसका समुचित उपाय है अथवा नहीं है और आपको चेतावनी दी जाती है अपना बचाव खुद रखे। साफ शब्दों में धर्म वाले इतना सच तो लोककल्याण को बता ही सकते हैं कि आपको सुरक्षित रहना ज़रूरी लगता है तो ईश्वर देवी देवता खुदा वाहेगुरु जीसस जिस किसी को मानते हैं और आरती पूजा ईबादत नमाज़ पढ़ना दीपक जलाना मोमबत्ती जलाना घर पर भी कर सकते हैं। लॉक डाउन से इतना तो सबने सीखा ही है। मन की शांति सबसे ज़रूरी है क्योंकि मन ही अशांत हो और असुरक्षित महसूस खुद को करते हैं तो भक्ति करना मुमकिन ही नहीं है।

    सभी दुनिया वाले शांति चाहते थे अब जब शांति ही शांति है तब भी चैन नहीं करार नहीं बेचैनी है। शांति इधर उधर भागने से नहीं मिलती पर्वत जंगल नदियां झरने कहीं भी शांति बची नहीं। ये तब समझ आया जब घर में बैठे हैं तब अब बाहर जाते घबराते हैं डरते हैं घर से सुरक्षित जगह कोई भी नहीं है। अब हैरानी की बात है कि लोग शांति से भी उकताहट महसूस करने लगे हैं उनको कोलाहल की शोर शराबे की आदत लग गई थी शांति उनको लगता है कोई अनचाहा बोझ है ढोना पड़ रहा है। कोई इंसान किसी इंसान से लड़ना चाहता है जीतना चाहता है कोई देश किसी देश को अपने आधीन करने को बेताब है। बहुत लोगों का यही कारोबार भी है बात शांति की कारोबार युद्ध का अब उनकी हालत अजीब है न शांति है न युद्ध ही करने का साहस बचा है। आदमी पहले अपनी शांति को खुद ही भंग करता है फिर अशांत मन शांति शांति कहने लगता है। हां ऐसी शांति नहीं चाहता कोई भी श्मशान की शांति जैसी मगर बाहर कोई और शांति नहीं मिलती है। वास्तविक शांति अपने भीतर खोजनी होती है अपने खुद के साथ रहकर बाकी सब दुनिया से दूर अकेले में। समय बिताना नासमझी है समय की कोई कीमत नहीं अनमोल है इसका उपयोग करना चाहिए।

 शांति को समझने ढूंढने और पाने के लिए आपको इक भजन सुनाते हैं इंसान ईश्वर से पूछता है आपको किस तरह पाया जा सकता है और ईश्वर बताता है मन को पा लो सब मिल जाएगा , मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा न कोय। मन उजियारा जब जब फैले जग उजियारा होय। जग से चाहे भाग ले कोई मन से भाग न पाये। तोरा मन दर्पण कहलाये। हां ये किसी नेता के मन की बात कदापि नहीं है , आपकी अपनी मन की बात है जो मन ही जानता है।


 

2 comments:

Sanjaytanha said...

बढ़िया लिखा है sir

रमेशराज तेवरीकार said...

अनुपम विचार