Monday, 4 May 2020

यमराज - कोरोना संवाद ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

      यमराज - कोरोना संवाद ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया 

    बस बहुत हुआ अब और नहीं , कोरोना हाथ जोड़ यमराज से इस काम से छुट्टी मांग रहे हैं। यमराज समझा रहे हैं आप किन की चिंता कर रहे हैं जो लॉक डाउन से परेशान हैं। आपको उनके कर्मों का हिसाब पता चले तो उनको जेल में बंद करने की नौबत आने की बात लगेगी। अभी उनको सज़ा मिलने का तो सवाल ही नहीं है ये तो केवल समझाने को चेतावनी भर है। वैसे भी ये लोग आज़ाद कभी नहीं रहे हैं गुलामी इनकी फ़ितरत बन गई है उसकी नहीं तो इसकी गुलामी करने की आदत है। कोरोना कहने लगे आपकी बात अपनी जगह ठीक है मगर जब कोई घबराता डरता खुद अपने आप से है नाम मेरा नाहक बदनाम करते हैं। यही रहा तो हर किसी की मौत का इल्ज़ाम मेरे सर पर धर दिया जाएगा। कोई नहीं जानता कितने लोग अपनी अपनी सरकार की लापरवाही से मौत के शिकार होते रहे कितने लोग खाने पीने शीतल पेय तक क्या मिलावट और नकली दवाओं से जान से हाथ धो बैठे किसी ने किसी को दोषी नहीं बताया। कौन जाने जो बाबा सब बेचते हैं योग को भी कारोबार बनाया है उनकी वास्तविकता कुछ और हो। उनके सभी कामों से कमाई बहुत हुई मगर रोग कितने घटे हैं कोई नहीं सोचता है। मुझे चिंता है ऐसे लोग मेरे उपचार का भी दावा कर और भी मालामाल हो सकते हैं। कैसे इन सभी को कोई समझाए कि कोरोना है क्या और क्यों है।

    यमराज बोले तुम भी नहीं जानते खुद अपने आप को देखो डॉक्टर्स सच बता रहे हैं तुम अपना स्वरूप बदल रहे हो तुम पहले भी थे आज भी हो और बहुत लोग ये भी समझते हैं कि तुम हमेशा रहोगे। कोरोना का नहीं होना का मतलब ये नहीं है कि कोई भी नहीं मरेगा। मौत अपनी जगह है तुम अपनी जगह हो कोरोना नहीं होता तो कोई और नाम होता। तुम अपने आप नहीं आये हो तुम्हें बुलाया गया है हैरानी है जिन्होंने तुम्हें बुलाया भी और समझाया भी उनकी बात भी लोग भूल गए हैं। कितनी बार कितने लोग तुम्हें बुलाने को उस मंत्र को रटते रहे थे कोरोनॉलजी को समझो। नहीं समझ आया अभी भी कौन क्यों क्या समझा रहा था। ये बदला रंग ढंग तुम्हारा उसे कोरोनॉलजी शब्द से पैदा हुआ है। खुद को जान लो और जिनकी संतान बनकर आये हो उनको पहचान लो। मगर यहां भूल कर भी किसी से कोई नाता मत जोड़ना क्योंकि ये वो दुनिया है जिस में कोई किसी का सगा नहीं है। मतलब हो तो गधे को बाप और मतलब नहीं हो तो बाप को गधा कहने में संकोच नहीं करते लोग।

   मुझे अच्छा नहीं लगता मुझसे हर कोई डरता है नफरत करता है घबराता है। मेरे नाम को सुनते लोग दूर भागते हैं भले मुझसे उन्हें कोई भी नुकसान नहीं हुआ हो।

    देखो कोरोना जी आजकल जब किसी से लोग भयभीत होते हैं किसी को ताकतवर समझते हैं किसी का नाम सबकी ज़ुबान पर रहता है तब वह व्यक्ति खुद को भाग्यशाली समझता है। कभी किसी महिला का नाम विश्व की सबसे ताकतवर महिला के लिए समझते थे जब्कि उस के पास सत्ता का कोई ऊंचा पद नहीं था। बाद में कोई और नाम शोहरत की ऊंचाइयों को छूने लगा था। आजकल तुमने उन सभी को जाने किस किस को पछाड़ दिया है। सबसे ख़ास बात ये है कि अभी तक लोग बड़े बड़े रोगों से डरते थे और चाहते थे उनको दिल का दौरा लिवर का गुर्दे का फेल होना कैंसर टीबी शुगर जैसे रोग नहीं हों रक्तचाप की बिमारी से बचे रहें सेहत अच्छी हो मगर मोटापा नहीं हो। कोई भी ऐसे मरने को तैयार नहीं था। कभी किसी ने भी कोरोना जैसे जीवाणु जो खांसी ज़ुकाम थोड़ा बुखार जैसे लक्षण पैदा करता है उस से बचने की बात नहीं सोची थी। कभी अपने ईश्वर देवी देवता क्या डॉक्टर से भी ऐसा नहीं कहा था कि उसे इस रोग से नहीं मरना है।

   अभी भी कोई ये नहीं सोचता कि कोरोना नहीं कोई और गंभीर रोग भले हो जाए। अभी तुम से कोई शिकायत नहीं कर रहा है हर कोई दोषी किसी और को घोषित कर अपने को निर्दोष साबित करना चाहता है। जो तुम करते हो नेताओं अफ्सरों उद्योगपतियों हर किसी ने किया है। छोटी सी गलती पर मौत की सज़ा कत्ल करना भयभीत करना अपने अहंकार ताकत से दहशत पैदा करना। तुम ने तो ये जानकर नहीं किया है। कितने आराम से तुमने बिना कोई शोर कोई आहट किये दुनिया भर को अपना घर बनाया है। मुझे ये काम करते कितने युग हो गए हैं और लोग किस किस तरह नहीं मरे हैं मगर कभी इस से आसान मौत नहीं देखी मैंने इस से पहले। डॉक्टर भी समझा रहे हैं इस से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कोरोना रोग होने के बाद भी दो तीन प्रतिशत को छोड़ सभी ठीक हो जाते हैं अधिकांश तो किसी दवा उपचार के बिना ही। आखिर कोरोना को यमराज ने समझा ही लिया है।

दुनिया की बात क्या है किसी की सौ अच्छाईयां नहीं देखती इक बुराई को देख लेती है। अभी भी कुछ लोग देख रहे हैं तुम्हारे आने से क्या क्या अच्छा हुआ है कुदरत इंसानियत बहुत कुछ। शायद कुछ समय बाद तुम्हारा धन्याद करेंगे उनको ज़िंदगी का सबक सिखाने को मौत का सामना करने का हौंसला दे कर।


1 comment:

Sanjaytanha said...

बहुत बढ़िया सधा हुआ व्यंग्य👌👍