Sunday, 10 May 2020

आपका बही-खाता झूठ का पुलिंदा ( देशसेवा के नाम पर लूट ) डॉ लोक सेतिया

   आपका बही-खाता झूठ का पुलिंदा ( देशसेवा के नाम पर लूट ) 

                                 डॉ लोक सेतिया 

अगर अभी भी हमने नहीं समझा तो फिर शायद कभी भी नहीं समझेंगे। कृपया एक फरवरी के मोदी सरकार के बजट के निर्मला सीतारमन जी के भाषण को फिर से सुन लो। भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है। मगर देश के सामने संकट आया और लॉक डाउन में जब एक सौ तीस करोड़ लोग सरकार के कहने पर अपने काम धंधे छोड़कर घर में बैठे हैं और जैसे भी हो अपना गुज़र बसर कर रहे हैं तब ये देख कर हैरानी से बढ़कर शर्मिंदगी होती है कि देश और राज्यों की सरकारें जनता से दान में मांगने और पीएम केयर से लेकर तमाम अन्य कितने ही ढंग से धन जुटाने के बावजूद 45 दिन बाद ही अपने कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं दे पाने की हालत में हैं। आपको जान है तो जहान है का उपदेश देने वालों की जान आफत में आने लगी दो महीने जनता से कर नहीं मिल पाने से और बात बदल गई अब जान भी जहान भी। मगर जान किसकी आम नागरिक की जान तो होती ही है राजनेताओं के इशारों पर मरने मिटने को। जान की कीमत है तो देश के खज़ाने का तीन चौथाई भाग इस या उस तरह अपने पर खर्च नहीं लूट कर बर्बाद करने वाले मुट्ठी भर अधिकारी नेताओं या कुछ खास रसूख वाले धनवान लोगों के कभी नहीं भरने वाले भूखे पेट और हमेशा और अधिक जमा करने को व्याकुल उनकी तिजोरियां जो देश की आबादी का बीस फीसदी लोग भी नहीं हैं। मगर अभी भी आठ हज़ार करोड़ से अधिक मूल्य के दो जहाज़ केवल दो लोगों की सुविधा की खातिर खरीदने से संकोच नहीं हो रहा है। ये अंधेर नगरी चौपट राजा की ही बात है। 

देश की आज़ादी के बाद से ये लूट की व्यवस्था और भी बेशर्म होती गई है और भाजपा सरकार जो पिछली सभी सरकारों को लूटने वाले घोषित करती रही है उस ने सबसे अधिक लूट मचाई है। किसी भी प्रधानमंत्री ने अपने ऐशो आराम और शानो शौकत पर इतना धन बेतहाशा खर्च नहीं किया है। जाने ये किस तरह की ईमानदारी है जो पिछली सभी दलों की सरकारें अपने दल के लिए अकूत धन वैभव नहीं जमा कर सकीं और भाजपा की मोदी सरकार पांच साल में ही पांच सौ से सात सौ करोड़ से दो एकड़ ज़मीन पर भव्य अतिआधुनिक पार्टी का शानदार दफ़्तर 1. 70 लाख स्केयर यार्ड में रिकॉर्ड समय में निर्माण करवा लिया। मोदी जी ने 92  देशों की सैर 55 महीने में की जिन पर 2021 करोड़ खर्च किये गए ये खबर आप इंडिया टुडे पर पढ़ सकते हैं जो कि औसत हर देश की यात्रा 22 करोड़ खर्च हुआ। इतना ही नहीं भाजपा सबसे अमीर राजनैतिक दल बन गई और चुनाव पर सबसे अधिक धन उसी ने खर्च किया। अगर इनके साथ मोदी जी के देश भर में अपने दल या किसी अन्य गैरसरकारी आयोजनों पर हुए खर्च को भी जोड़ लें जिसका शायद कोई हिसाब किताब आंकलन ही नहीं संभव होगा तो देश को इन खुद को सेवक चौकीदार बताने वाले के एक एक मिंट की कीमत कितने लाख अदा करनी पड़ी बताना आसान नहीं है। ये सब बताने का मकसद है कि आज भी भाजपा दल के पास कितना धन है कोई नहीं जानता है मगर इस में कोई संदेह नहीं कि अगले सौ साल तक भी उसकी झोली थैली भरी रहेगी। मगर देश का खज़ाना कुछ दिन आमदनी नहीं होने पर खाली होने लगा है तो क्यों। 

देश सबसे पहले कौन कहता है , कोई है जो किसी भी राजनैतिक दल का सांसद विधायक है या रहा हो जिसने करोड़ों की जायदाद और बैंक बैलेंस खड़ा किया हुआ है आज अपना सभी कुछ अपने देश को संकट की घड़ी में देने की बात कहता। उन सभी की देशभक्ति कितनी सच्ची है समझ आ जाना चाहिए। इतना ही नहीं जिन धार्मिक बड़े बड़े स्थलों के पास लाखों करोड़ बंद तिजोरी में पड़े हैं उनको भगवान खुदा वाहेगुरु देवी देवताओं की शिक्षा क्या इतना मानवीय धर्म नहीं समझा पाई कि संचय करना छोड़ गरीब दीन दुःखी असहाय लोगों की सहायता करने पर ये धन खर्च कर दो यही गुरु नानक जी का सच्चा धर्म है। शायद अब तो समझना होगा कि मंदिर मस्जिद गिरजा घर गुरूद्वारे बनाने से पहले अस्पताल धर्मशाला स्कूल और जिनके ऊपर छत नहीं उनके लिए घर बनाना ज़रूरी है। 

गांधी जी की विचारधारा की बात करते हैं तो ऐसा अपराध कैसे किया जा सकता है कि कोई सरकार विदेशी कंपनियों को बुलाने को अपने देश के मज़दूरों की सुरक्षा के कानून को ही अगले तीन साल तक निलंबित करने का अध्यादेश जारी करे और राष्ट्रपति को पारित करने को भेजे। सत्ता का ये पागपन है कि जो दबे कुचले हैं उनका शोषण करने की छूट विदेशी ही नहीं जो पहले से हैं उनको भी मिल जाए। क्योंकि सरकार को खुद अपने लिए हर दिन बर्बाद करने को बहुत पैसा चाहिए। एक एक नेता अधिकारी सांसद विधायक क्या जो कभी पहले बने उनको भी सुख सुविधा देने को लाखों की ज़रूरत है। और आम नागरिक को जैसे भी हो जीने मरने की छूट भी मांगनी पड़ती है। गरीब को हर दिन अगर पचास रूपये कमाते हैं तो बहुत हैं रोटी खाने को ये हमारा योजना आयोग बताता था जिसका नाम बदल गया हो मगर मानसिकता नहीं बदली है। 

जाने किस विकास की बात का दावा था जी मोदी जी की सरकार जाने क्या क्या नहीं बेचा और किस किस तरह से रिज़र्व बैंक से बार बार और अधिक धन छीनने का काम नहीं किया गया फिर भी नतीजा वही सबसे अधिक भूखी नंगी सरकार है। याद करो गांधी जी का नाम लेने से पहले उनकी कही बात को। हमारे देश के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है सभी की ज़रूरत को बहुत कुछ है मगर किसी की भी हवस को पूरी करने को काफी नहीं है। ये कुछ बीस तीस फीसदी लोगों की हवस है जिसने देश के अधिकांश हिस्से पर कब्ज़ा जमाया हुआ है फिर भी उनकी गरीबी मिटती नहीं। देश गरीब नहीं है सरकार हमेशा भिखारी और गरीब रही है।

राजनेताओं को मालूम है कि वो जो भी मनमानी करते रहें लोग खामोश होकर तमाशा देखते हैं , उनके अनुचित कार्यों पर कोई सवाल नहीं उठाता है। और उनकी विलासिता की बातों को नापसंद करने के बाद भी देश की जनता बेबस होकर देखती है कुछ भी कर नहीं सकती। मगर हम भूल कैसे जाते हैं बहुत जल्दी ही। मोदी जी पहले के शासकों को पचास साल बाद भी दोष देते रहते हैं साथ ही खुद उनसे बढ़कर किसी शहंशाह की तरह अपनी शानो शौकत दिखाने का काम करते रहते हैं। आपको याद है 24 फरवरी 2020 को गुजरात के अहमदाबाद में नमस्ते ट्रम्प का आयोजन किया गया था। मकसद क्या था विश्व के सबसे बड़े स्टेडियम में अमेरिका के शासक को अपनी शान दिखाना लाखों की भीड़ जमा कर दिखाना। मगर तब कितनी विडंबना की बात सामने आई कि  जिधर से विदेशी मेहमान को गुज़रना था गरीबों की बस्ती को ढकने छुपाने को मीलों लंबी ऊंची दीवार बनानी पड़ी थी और उस पर क्या शानदार पेंटिंग की गई थी। यही वो समय था जब कोरोना देश में दस्तक दे चुका था। मोदी जी जश्न मनाने में खोये थे। कोई असंवेदनशील व्यक्ति ही ऐसा कर सकता है कि गरीबी को मिटाने पर नहीं छुपाने पर पैसा बर्बाद करता है। मोदी जी जैसे शासकों के पास गरीबों के लिए भाषण को छोड़ कुछ भी है। मगर अपने दोस्तों के लिए सब हाज़िर है , मोदी जी की दोस्ती भारत को बेहद महंगी पड़ी है।


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