Wednesday, 23 January 2013

फूलों के उसे पैगाम दिये( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

फूलों के उसे पैगाम दिये( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

फूलों के उसे पैग़ाम दिये
जिसने थे ज़हर के जाम दिये।

हर ज़ख्म दिया अपनों ने मुझे
कुछ सुबह दिए कुछ शाम दिये।

सूली पे चढ़ा कर खुद हमको
हम पर ही सभी इल्ज़ाम दिये।

कल तक था हमारा दोस्त वही
ग़म सब जिसने ईनाम दिये।

पागल समझा ,दीवाना कहा
दुनिया ने यही कुछ नाम दिये।

हर दर्द दिया यारों ने हमें
कुछ ख़ास दिये , कुछ आम दिये।

हीरे थे कई ,   मोती थे कई
"तनहा" ने  सभी बेदाम दिये।

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