Monday, 3 December 2012

बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बेवफ़ा हमको कह गये होते
हम ये इल्ज़ाम सह गये होते।

बहते मौजों के साथ पत्थर भी
जो न साहिल पे रह गये होते।

ग़म भी हमको सकून दे जाता
हंस के उसको जो सह गये होते।

ज़ेब देते किसी के दामन को
अश्क जो यूं न बह गये होते।

यूं न हम राह देखते उनकी
जो न आने को कह गये होते।

थाम लेते कभी उसे बढ़कर
दूर "तनहा" न रह गये होते।

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