मई 10, 2020

कोरोना वध घोषित ( व्यंग्य-कथा ) डॉ लोक सेतिया

      कोरोना वध घोषित ( व्यंग्य-कथा ) डॉ लोक सेतिया 

      झूठ सच से बड़ा हो गया , महाभारत में अश्वथामा के वध की घोषणा ने बाज़ी पलट कर रख दी है। टीवी पर ये दृश्य देखते ही दौड़े दौड़े राजन के पास आये और बोले कब तक हम जीतेंगे का संदेश टीवी सोशल मीडिया पर देते रहेंगे। आप को महारत हासिल है दिन महीने सप्ताह क्या पल पल नया संदेश देते ही रहे हैं। अमेरिका के महाराज घोषित कर चुके हैं कि कोई दवा वैक्सीन से नहीं कोरोना खुद ब खुद ख़त्म हो जाएगा। यही समय है कि कोई और कोरोना को मिटाने का दावा करे उस से पहले हम घोषित कर सकते हैं कि हमने उसका अंत हमेशा हमेशा के लिए कर दिया है। जैसे अश्वथामा की मौत की झूठी खबर सुनते ही गुरु द्रोणाचार्य अपने हथियार डाल देते हैं उसी तरह कोरोना का वध का समाचार सुनते ही चीन भी घुटने टेक देगा और उस समय कोई भी चालाकी से उस से कोरोना का रहस्य जान सकेगा। कोरोना कैसे पैदा हुआ पता चलते ही कैसे ख़त्म किया जा सकता है समझना आसान हो जाएगा। 

   राजन सोचने लगे कि ये घोषणा किस से करवाई जाए जिस पर हमारे देश और दुनिया को सच बोलने का पूर्ण विश्वास हो। अपने दल में ऐसा कोई सत्यवादी ढूंढना मुमकिन नहीं है और चाहे जो भी तलाश करें मिल सकता है। जैसे महाभारत में भीम की बात का भरोसा नहीं किया मगर धर्मराज युधिष्ठर के झूठ का यकीन करना ही पड़ा कि वही सत्य है। जाने क्या सोचकर मनमोहन सिंह जी को फोन मिलाया और कहा क्या आप ऐसे समय हमारी सहायता कर सकते हैं। सरदारजी कहने लगे बताओ क्या सेवा है सिख धर्म में सेवा करना सबसे अच्छा समझते हैं। राजन बोले बस आपको इक झूठ बोलना है ये घोषणा करनी है कि हमने देश की सरकार और विपक्ष ने एक साथ मिलकर कोरोना को खत्म करने में सफलता हासिल कर ली है। सुनकर मनमोहन सिंह अचरज में पड़ गए और कहा जनाब झूठ बोलने में मेरा अनुभव इतना नहीं है कोई और हो सकता है जो इस कला में सिद्धस्त हो और जिसका बोला झूठ भी सच लगता हो। राजन समझ गए ये बहाने हैं साथ नहीं देने के , बोले अर्थात आप कोरोना से लड़ाई में सरकार का साथ पूरी तरह से नहीं दे रहे हैं। 

    मनमोहन सिंह ने समझाया आपको शायद विदित नहीं है हम हर दिन सुबह शाम " सत श्री अकाल " कहकर अभिवादन करते हैं जिस का अर्थ है " सत्य ही ईश्वर है "। ये हमारा मूल सिद्धांत है जैसे देश का     " सत्यमेव जयते " है अर्थात सच की विजय हो और आप झूठ की विजय की चाह कैसे कर सकते हैं। अब फोन बंद करने के इलावा कोई रास्ता बचा ही नहीं था। तभी भगवा धारण किये इक बाबा जी खुद ही चले आये और ये समस्या सुनते ही बोले आप चिंता मत करो , अन्यथा नहीं लेना आप तो ये घोषणा कभी नहीं करना क्योंकि आपकी बात को लोग सच समझते ही नहीं हैं। सबने समझ लिया है आप जो कहते हैं वास्तविकता उसके उल्ट नज़र आती है। मगर मुझे खूब आता है झूठ को सच से बड़ा बनाना , मेरा झूठ बाज़ार में सबसे ऊंचे भाव बिकता है। मैंने कुछ भी खोजा नहीं कोई शोध नहीं किया और खुद कुछ भी नहीं करता मगर मेरे नाम से सब सामान असली और शुद्ध कहला कर खूब बिकता है। अभी तक मैं सबको कोरोना से बचने के उपाय बताता था जो कितने सच हैं मुझे भी नहीं खबर मगर लोग मानने लगे थे। अब मेरे कहने से सभी भरोसा करेंगे ही और मेरी कंपनी के शेयर भी महंगे हो जाएंगे। राजन कलयुग में झूठ बिकता है आपने भी कभी जमकर बेचा था अच्छे दिन को फिर उसको आपके ही लोग जुमला बताने लगे। जब भी झूठ बोलना हो उसको हमेशा सच समझ कर यकीन से बोलना चाहिए। अभी आपको कुछ और अभ्यास करना पड़ेगा मुझे इसका अभ्यास किसी भी अन्य कार्य से बढ़कर है। टीवी चैनलों पर बाबाजी के हर विज्ञापन के साथ उनका ये दावा भी शामिल किया गया है कि उन्होंने कोरोना को जकड़ लिया था और उसका वध करने तक छोड़ा नहीं था। उसको भस्म कर दिया है।
 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Ha ha ha...Bahut bdhiya..