Sunday, 26 April 2020

अगले जन्म के साथी ( वयंग्य-विनोद कथा ) डॉ लोक सेतिया

   अगले जन्म के साथी ( वयंग्य-विनोद कथा ) डॉ लोक सेतिया 

ईश्वर हर आत्मा से ये सवाल करते हैं कि अपने पिछले जन्म के किस संबंध को आप अपने आने वाले जन्म में भी रखना चाहते हैं। ये सवाल आपको आसान लगेगा और खुश भी हो जाओगे मगर जो होने वाला है उससे अनभिज्ञ मुमकिन है आपको पछतावा भी हो। सबसे पहले दो बातें जान लेना कि जिसे भी आप अगले जन्म में मांगने लगे हैं उस से आपका नाता वही नहीं हो सकता है जिसकी आपने कल्पना की हो। क्योंकि विधाता ने आपका उसका ही नहीं सभी का पिछले जन्म का बकाया हिसाब लेना-देना बराबर करना है। इक आत्मा की बात से उदाहरण लेकर समझते हैं। आत्मा ने कहा मुझे अमुक व्यक्ति से नाता रखना है तथास्तु कह ईश्वर ने उसको पंछी बना दिया क्योंकि जिस से नाता मांगा था उसको सय्याद बनाया जा चुका था। अब पंछी और सय्याद का नाता तो कोई प्यार मुहब्बत का हो नहीं सकता है। आत्मा चाहती कुछ थी और सामने जो आना है उसकी कल्पना भी नहीं की थी। 

कई लोग जीवन भर निराश होकर सोचते हैं कि माता पिता भाई बहन पत्नी दोस्त जो हैं उनकी जगह किसी और को लेकर विचार करते हैं। पिता हो तो उस धनवान या बड़े नाम वाले या किसी शासक या जाने क्या क्या जिसके पास हो माता कैसी भाई दोस्त कैसा इस तरह से। पत्नी को लेकर किसी बेहद खूबसूरत और भोली आज्ञाकारी महिला की कल्पना करते हैं जब आत्मा ने ऐसी किसी नारी से संबंध की बात की तो जो हुआ बेहद अजीब था। ये बताना थोड़ा अवांछित है मगर इतना समझ लो उनका संबंध बाज़ारी बन गया इक बिकने दूजा उसे बेचने का काम करने वाला है। समझदार कोई कोई आत्मा होती है जो ईश्वर से कहती है विधाता आपने पिछले जन्म जिनसे जो भी संबंध बनाकर जन्म दिया मैंने आपकी मर्ज़ी समझ स्वीकार किया था। पति पत्नी पिता माता भाई बहन जो भी थे सभी अपनी जगह ठीक थे भले उन सभी में अच्छाईयां भी थीं बुराईयां भी थीं लेकिन मुझमें भी ये सब था ही। अपने जो उचित समझा किया था मैंने कभी भी आपसे कोई शिकायत नहीं की थी। बस अब भी आपको जैसा उचित लगता है वही मेरे लिए अगले जन्म में रख देना मगर इतना अवश्य करना कि तब भी मुझे जो भी लोग मिलें उनको दिल से अपनाने का साहस मुझमें हो। ऐसे में ईश्वर कभी कुछ भी खराब नहीं कर सकते हैं जो अच्छा है हमारे लिए विधाता को हम से अधिक पता है। 

किसी आत्मा ने मांगा उसको अगले जन्म में उस शासक से संबंध रखने की चाहत है जिसकी भक्ति से बढ़कर ईश्वर की भी भक्ति नहीं लगती थी उसे। तथास्तु कह दिया और ये भी बताया कि अगले जन्म उसे इक शिकारी बनना है इसलिए तुमको जानवर बन उसका शिकार बनना होगा मगर तुम्हारा जन्म फिर ऐसे जानवर के रूप में होगा उस का अंत भी तुम्हें ही करना होगा। शिकारी भी खुद शिकार हो जाते हैं। अनजान लोग नहीं जानते हैं कि हम क्या चाहत रखते हैं और उसका नतीजा क्या हो सकता है। आपको इस बात की तसल्ली ज़रूर हो गई होगी कि न केवल अगला जन्म होना ही है बल्कि वो भी आपकी इच्छा को पूछकर ही विधाता निर्णय करेगा।

        अब मरने से घबराने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि फिर से जन्म लेना भी है।
                        वो इक ग़ज़ल है सुनोगे। 

हरेक रंज में राहत है ज़िंदगी के लिए , पय्याम ए मौत भी मुजदा है ज़िंदगी के लिए। 
                                   ( मुजदा = तोहफ़ा )
हमारी ख़ाक को दामन से झाड़ने वाले , सब इस मुकाम से गुज़रेंगे ज़िंदगी के लिए। 

उन्हीं के  शीशा ए दिल चूर चूर होके रहे  , तरस रहे थे जो दुनिया में दोस्ती के लिए। 

मैं सोचता हूं के दुनिया को क्या हुआ या रब , किसी के दिल में मुहब्बत नहीं किसी के लिए। 

चमन में फूल भी हर एक को नहीं मिलते , बहार आती है लेकिन किसी किसी के लिए। 

हमारे बाद अंधेरा रहेगा महफ़िल में , बहुत चराग़ जलाओगे रोशनी के लिए। 

जो काम आए मेरी ज़िंदगी तेरे हमदम , तो छोड़ देंगे दुनिया तेरी ख़ुशी के लिए। 

किसी ने दाग़ दिए दोस्ती के दामन पर , किसी ने जान भी लुटा दी दोस्ती के लिए। 

                               शायर :- मख़मूर देहलवी 

( मुझे ये ग़ज़ल बेहद पसंद है और कॉलेज के ज़माने से मैंने इस को बहुत गुनगुनाया है सुनाई है गाकर )

मौत तो दरअसल इक सौगात है , हर किसी ने इसे हादिसा कह दिया 

ये मेरी ग़ज़ल का शेर है और मेरा यकीन भी यही है। मौत तू इक कविता है सुनी है आपने कविता।



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