Monday, 30 July 2012

एक पत्नी ने बनवाया नया इक ताज ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

 एक पत्नी ने बनवाया नया इक ताज  ( कविता )  डॉ लोक सेतिया

बनवाया होगा ,
किसी बादशाह ने ,
अपनी मुमताज के नाम ,
कोई ताजमहल ,
मुझे नहीं है ,
उसे देखने की ,
कोई चाहत।

मगर चाहता हूँ ,
किसी दिन मैं ,
जा कर देख आऊं
उस ,
ह्युम्निटी हस्पताल को ,

जिसे बनवाया है
एक मज़दूर की पत्नी ने ,
पति की याद में ,
पति के बिना इलाज ,
मरने के बाद।

अपने बेटे को ,
अनाथालय में भेजकर ,
की तपस्या ,
अपने सपने को ,
पूरा करने की ,
डॉक्टर बनाया उसको ,
ऐसा अस्पताल ,
बनाने के लिए।
 
ताकि अब और ,
किसी गरीब को ,
पैसा पास न होने के कारण ,
कोई कर न सके ,
इलाज से इनकार।

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