Monday, 27 April 2020

हमें चाहिए वो पुराना ज़माना ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

 हमें चाहिए वो पुराना ज़माना ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" 

हमें चाहिए वो पुराना ज़माना
मिला सबको करता था जब आबो दाना। 

फ़रिश्ते तुझे अब बताना पड़ेगा  
बचा है कहीं पर हमारा ठिकाना। 

बड़ी खूबसूरत थी सोने की चिड़िया 
कहानी वही फिर हमें मत सुनाना। 

कहां ले के आईं उड़ानें तुम्हारी 
कभी एक दिन सच सभी को बताना। 

कहोगे न जाने अभी और क्या क्या 
हो फ़रमान जो भी पड़ा सर झुकाना। 

दिखाए तो हमको बहुत ख्वाब लेकिन 
ज़रूरी न समझा था ताबीर लाना। 

हैं शीशे के उनके महल सारे "तनहा" 
बना जोड़ तिनके तेरा आशियाना।

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