मार्च 05, 2026

POST : 2063 हमको वापस अभी तो जाना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

  हमको वापस अभी तो जाना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' 

 
हमको वापस अभी तो जाना है  
इक ठिकाना , कहीं बनाना है ।  
 
लोग कितना बदल गए देखो 
रोज़ , कोई , नया बहाना है । 
 
उम्र भर , कौन साथ देता है 
एक दिन सब ने छोड़ जाना है । 
 
था बुरा कौन कौन अच्छा था 
सिर्फ़ बीता हुआ ,  ज़माना है । 
 
हमको आवाज़ कौन अब देगा 
किसलिए अब हमें बुलाना है । 
 
मुझको इतना ज़रा बताओ तो 
याद रखना , किसे भुलाना है ।
 
चंद सांसें अभी बची ' तनहा '
धड़कता दिल ठहर ही जाना है ।  
 

 

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