तिरंगा फहराएंगे ( कविता ) डॉ लोक सेतिया
बलशाली नहीं हैं सब के सब कायर हैं
आधुनिक काल के कुछ जनरल डायर हैं ।
पुलिस फ़ौज बंदूकों से न तलवारों से
निहत्थे लोग कभी नहीं डरते अय्यारों से ।
( अय्यारों का अर्थ है बहरूपियों )
सत्ता का अहंकार जनता मिटा देती है
हर तानाशाह को जब चाहा हटा देती है ।
कब तलक विरोध को कोई भी दबाएगा
जनभावनाओं से जो उलझेगा मिट जाएगा ।
हमने तो कफ़न अपने सर पे बांध रखा है
मुल्क का भविष्य पढ़ो दीवार पर लिखा है ।
जो बिक चुके हैं कभी नहीं समझ पाएंगे
बे - ज़मीर लोग ज़िंदा होकर भी मर जाएंगे ।
कौन रोक सकता है हम तो ज़रूर आएंगे
अपना तिरंगा शान से सब मिल फहराएंगे ।

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