अक्टूबर 17, 2026

POST : 2131 तिरंगा फहराएंगे ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

                तिरंगा फहराएंगे  ( कविता ) डॉ लोक सेतिया 

बलशाली नहीं हैं सब के सब कायर हैं 
आधुनिक काल के कुछ जनरल डायर हैं ।
 
पुलिस फ़ौज बंदूकों से न तलवारों से 
निहत्थे लोग कभी नहीं डरते अय्यारों से ।    
 
( अय्यारों का अर्थ है बहरूपियों ) 
 
सत्ता का अहंकार जनता मिटा देती है 
हर तानाशाह को जब चाहा हटा देती है ।  
 
कब तलक विरोध को कोई भी दबाएगा 
जनभावनाओं से जो उलझेगा मिट जाएगा । 
 
हमने तो कफ़न अपने सर पे बांध रखा है  
मुल्क का भविष्य पढ़ो  दीवार पर लिखा है ।  
 
जो बिक चुके हैं कभी नहीं समझ पाएंगे 
बे - ज़मीर लोग ज़िंदा होकर भी मर जाएंगे ।  
 
कौन रोक सकता है हम तो ज़रूर आएंगे 
अपना तिरंगा शान से सब मिल फहराएंगे । 
 

 

कोई टिप्पणी नहीं: