अक्टूबर 12, 2026

POST : 2128 इंदिरा गांधी जयप्रकाश संवाद ( खरी खरी ) डॉ लोक सेतिया

       इंदिरा गांधी जयप्रकाश संवाद ( खरी खरी ) डॉ लोक सेतिया  

किसी और दुनिया में ख़ुद ही स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री लोकनायक से मिलने पहुंची बहाना था 11 ऑक्टूबर का जन्म दिन का अवसर उचित लगा ।  मुझे देश क्षमा नहीं करेगा लेकिन मुझे आपसे क्षमा मिल जाएगी जानती हूं , पिता समान हैं आपने चाचा होने का फ़र्ज़ निभाया था हमेशा ।  मेरे पिता आपका बड़ा आदर किया करते थे भले उनकी आपकी दोनों की राजनीतिक विचारधारा अलग अलग थी , लेकिन दोनों की राष्ट्रभक्ति एक समान थी ।  रास्ते अलग अलग थे मंज़िल एक ही लक्ष्य समाज देश विशेषकर शोषित वंचित जनता को अधिकार और बुनियादी सुविधाएं देने का संकल्प था ।  मुझे याद है कि एक बार चुनाव में जब जवाहर लाल नेहरू जी भाषण दे रहे थे और उनको जानकारी मिली थी कि उनके कुछ समय बाद वहीं  उस शहर में आपने जनता को संबोधित करना है तब उन्होंने एकत्रित भीड़ को कहा था कि मुझे मालूम हुआ है जयप्रकाश जी ने भाषण देना है मेरा आपसे आग्रह है कि आप उनको अवश्य सुनिए , हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हैं लेकिन वह बहुत ही शानदार व्यक्ति हैं उनकी बात सुनकर आपको सुखद अनुभव होगा ।  ये बात मुझे ध्यान रखनी चाहिए थी और आपने जो 25 मार्च 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में भाषण में बोली थी , वो बिलकुल सही थी और मैंने उसको कारण बनाकर आपात्काल की घोषणा कर गलती ही नहीं बल्कि बड़ा अपराध किया था ।  आपने पुलिस सुरक्षाबलों और प्रशासन से उचित ही कहा था कि वो सभी किसी सत्ताधरी शासक सरकार या राजनेता के नौकर नहीं देश कानून और संविधान के प्रति कर्तव्य निभाना उनका मकसद है , इसलिए कोई भी जनता या नागरिक पर लाठी गोली चलाने का आदेश देता है उनके शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने पर तब आपको उनका आदेश नहीं मानना है और विवेकपूर्ण न्यायसंगत निर्णय लेते हुए शासक से इनकार कर सकते हैं ।  आज वही बात मेरा पोता जनता और सत्ता को बताना चाहता है लेकिन किसी पर कोई असर ही नहीं हो रहा है , मेरी तरह से सत्ता का अहंकार किसी और को गुमराह कर रहा है ।  लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई बात कितनी खरी साबित हुई है बस आपसे क्षमा याचना से रूह को चैन मिलेगा ।   
 

 

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