Thursday, 5 July 2018

मूर्खों की कमी नहीं है , मूर्खता की सीमा नहीं है ( खरी-खरी ) डॉ लोक सेतिया

     मूर्खों की कमी नहीं है , मूर्खता की सीमा नहीं है ( खरी-खरी ) 

                                         डॉ लोक सेतिया 

  शायद ही कोई हो जो खुद को मूर्ख मानता हो , मगर शायद ही कोई हो जो कभी मूर्ख नहीं बनाया गया हो। हम लिखने वालों का हौसला है जो पहली अप्रैल को धूम धाम से मूर्खता दिवस मनाते हैं। बाहर लोग बुद्धीजीवी समझते हैं खुद अपने घर में मूर्ख होने की सबसे बड़ी उपाधि पाते हैं। आओ सभी समझदारो आज आपको ये सबक भी पढ़वाते हैं। आपकी नहीं अपनी कहानी दोहराते हैं। जो मूर्ख बनाने की कला जानते हैं वही पंडित जी कहलाते हैं। भगवान को भोग लगाने वाले खुद खाते हैं भक्त लोग नाम को ही प्रसाद पाते हैं। आपका भविष्य क्या है समझाते हैं। मैं तीस साल तक इस मोहजाल से बचा रहा , जो भी मिला उसी को मुकदर समझा। मगर फिर भविष्य बताने वालों की चौखट पर ऐसा गया कि सब समझ कर भी नहीं कुछ भी समझा। अच्छे दिन आने वाले हैं देश की जनता को चार साल पहले बताया गया होगा , मुझे हर साल यही राशिफल बताया जाता रहा। मुझे ज़िंदगी से नहीं कोई शिकवा गिला , अफ़सोस है जो कुंडली में लिखा हुआ बताया बस वही कभी नहीं मिला। मगर शराब नहीं पीता फिर भी उधर जाता रहा और साकी से यही कहा कभी कोई जाम मुझे भी तो पिला। थोड़ी सी तो लिफ्ट करा दे , मुझको बंगला कार दिला दे। कैसे केसों को दिया है , ऐसे वैसों को दिया है। सपने बेचने वालों की दुकान में सामान कुछ नहीं होता है। 
             अपने देश में भविष्यवक्ता गली गली हैं , सब कहते हैं जो भाग्य में लिखा वही मिलता है , मगर साथ साथ भाग्य बदलने की बात भी करते हैं। उपाय बताते हैं जाने क्या क्या नहीं करवाते हैं। सच ये है जेब खाली करवा हम खाली हाथ आते हैं। अगर वास्तव में इन सब से समस्याओं का निदान होता तो अपने देश में इतने लोग हर दिन यही करते  करवाते हैं , उस से सब ठीक हो जाता। सरकार नेता अधिकारी सभी हर काम का शुभ मुहूर्त निकलवाते हैं ये पुल फिर भी गिर जाते हैं।  हम वो लोग हैं जो बच गए तो शुक्र मनाते हैं मरने वालों की कब्र पर फूल चढ़ाते हैं।  मौत आई थी आनी है आएगी दोहराते हैं। चलो देखते हैं अच्छे दिन वाले अबके क्या ख्वाब बुनकर बहलाते हैं। आज आपको इक सच्ची कथा सुनाते हैं। 
                    घटना सच्ची है नाम नहीं बताना उचित। कोई अपने कारोबारी भागीदार को साथ लेकर मीलों दूर इक जाने माने ज्योतिषाचार्य की चौखट पर गया। साथ उसका परिवार भी था। इस कहानी का कल रात की ज़िंदगी के क्रॉस रोड्स से कोई संबंध नहीं है। हाथ की रेखाओं को देखकर पति को कष्ट की बात बताई और पत्नी को लंबी आयु की बात समझाई। वापस आने के महीने भर बाद पत्नी की अचानक बारी आई , उसकी मौत से भागीदार बहुत घबराई। उनसे सवाल पुछवाया ये पहले क्यों नहीं बताया भाई। तब ज्योतिष विज्ञान की परिभाषा गई समझाई। पति को कष्ट आना था तभी पत्नी को जाना था। महिला की लंबी आयु में दोष उसके पति की लंबी आयु को रखा उपवास सफल रहा खुद सदा सुहागिन रही पति को अकेला कर आई। 
         वास्तुशास्त्र वाले घर के द्वार पर धातु की बनी शेर की भाला लिए खड़े सुक्षाकर्मी की , कोई तलवार को दीवार पर टंगवा कर उपाय करता है सुरक्षा का। देश की सीमा पर वास्तुशास्त्रीय सुरक्षा होती तो आतंकवादी कैसे भीतर आते। राजनेता कभी पड़ोसी देश के साथ जंग नहीं करने की बात नहीं करते हैं , उनका मिलना इस बात को लेकर होता है कि कब ब्यानबाज़ी करनी है कब फूल भेजने हैं और कब सीमा पर लड़ाई और नफरत की बात करना फायदे की बात है। हर कोई दूसरों को मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा करता है , सब चाहते हैं कोई मिले जिसे बुद्धू बनाकर समझदार होने का प्रमाण हासिल किया जाये। मगर इक कहावत है कि आप कुछ लोगों को कुछ समय तक मूर्ख बना सकते है लेकिन सब को हमेशा के लिए मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। आज़ादी के सत्तर साल बाद देश की जनता मूर्ख बनती रही है मगर हमें मूर्ख बनाने वाले लोग बदलते रहे हैं। कोई पांच साल तो कोई दस साल तक मूर्ख बनाने में कामयाब होता रहा है। हमारी जन्म कुंडली में कोई मंगल शनि राहु दोष नहीं है , दोष है मूर्खता काल में जन्म लिया है हमने। आपको शायद मालूम नहीं जब आज़ादी मिलनी थी तो पंडितों ने ज्योतिष वालों ने आधी रात का समय अशुभ बताया था। बस कुछ घंटे और गुलामी में रह लेते तो सुबह शुभ समय में आज़ादी मिलती और ये घना अंधेरा जो छाया हुआ है शायद नहीं होता। अंधकार को दूर किया जा सकता है मगर जब लोग गंधारी की तरह खुद अपनी आंखों पर किसी नेता या दल की निष्ठा की काली पट्टी बांध खुद ही सच नहीं देखना चाहते तो कोई रौशनी काम नहीं आ सकती है।

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