Sunday, 29 July 2018

अब बाबाजी फैशन बाज़ार में ( टेड़ी बात ) डॉ लोक सेतिया

    अब बाबाजी फैशन बाज़ार में ( टेड़ी बात ) डॉ लोक सेतिया 

   बाबाजी की दुकान में सब कुछ बिकता है फिर भी अभी बाबाजी को समझ नहीं आता बाकी दुकानदार क्यों हैं बाज़ार में। लालची लोगों ने हर माल में मिलावट कर दी है , बाबाजी की दुकान पर जो भी माल बिकता है  बस वही शुद्ध सस्ता और असली है। हर दिन बाबाजी परेशान होते हैं अभी कितना कुछ है जो उनकी दुकान में नहीं बिकता है और लोगों को किसी और की दुकान पर जाना पड़ता है। खाने पीने से साबुन शैम्पू शहद से आटा दाल तक यहां तक कि फर्श साफ करने का देसी फार्मूला वाला पदार्थ भी उनका अपना है जो मालूम नहीं कौन किस जगह किस तरह बनाता है। बाबाजी की मोहर लगते शुद्धता की गारंटी समझी जाती है। आज कोई नया कारोबारी आया है जो चाहता है कि बाबाजी के नाम से नया फैशन चलाया जाये। बाबाजी को पहली बार लगा ये कोई मज़ाक है क्योंकि खुद बाबाजी जो पहनते हैं वो कभी कभी लगता है नाम को ही पहना हुआ है एक वस्त्र। नहीं बाबाजी हमारा मतलब सबको भगवा रंग पहनाने का नहीं है , हम तो सवदेशी पहनने को प्रकृतिक ढंग से बनाये परिधान बाज़ार में लाना चाहते हैं जो आपके नाम से आपके खुद विज्ञापन में नेचुरल घोषित होंगे और जिनको पहन कर लोग सभी तरह के रोगों से बच सकेंगे ये भी आप ही बताया करेंगे। आपके नाम से बने परिधान रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर सब को तंदरुस्त करेंगे। आपने तीस साल की रिसर्च के बाद उनको बनाया है सब को बताया करेंगे। बाबाजी आप जो भी कहोगे लोग मान लेंगे। काला धन आपने ही तो सफ़ेद किया या करवाया है सरकार द्वारा। आपको विज्ञापन में हरे हरे पेड़ के पत्तों से तन ढक कर दिखाना होगा कि इनसे ही बनाकर आप पहनने को सूट साड़ी कमीज़ सलवार और जींस तक बना लिया है। आपके नाम से डिज़ाइन पेटंट करवा सकते हैं। बाबजी को मालूम हुआ आज कि कितना बड़ा कारोबार यही अकेला है , अगर सारा देश उनके बनाये परिधान खरीद कर पहनेगा तो अंबानी टाटा बिरला सब उनके सामने पानी भरते दिखाई देंगे। मगर इक सवाल ने परेशानी खड़ी कर दी है कि सरकारी सहायता से जितने भी लोग नंगे बदन रहते हैं उनको मुफ्त पहनने को वस्त्र मिल सकेंगे। नहीं फिर तो देश की असली पहचान ही मिट जाएगी। बाबाजी जानते हैं सरकार देश की सदियों पुरानी पहचान फिर से कायम करने को कितनी बेचैन है उसको ये सुझाव पसंद कैसे आएगा। सरकार को राज़ी किया जा सकता है कि किसी को भी सूती रेशमी या किसी भी आधुनिक ढंग से बने परिधान को पहनने पर रोक लगाई जाये क्योंकि हमारे पूर्वज केवल पेड़ों के पत्तों से तन ढकते थे।  ये सौदा भी गोपनीयता की शर्त के साथ किया जायेगा ताकि कोई कीमत पर सवाल नहीं पूछ सके।

1 comment:

sanjay said...

बाबा का हर चीज़ पर दावा...👌👍
बढ़िया👌 है