Friday, 25 November 2016

ज्योतिष वास्तुशास्त्र और देश की हालत ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

               मैं भूल गया था , फिर से याद दिला दिया आपने , ऐसा अक्सर होता ही है हम सभी के साथ। ओह याद आया , काश पहले याद आ जाता तो समस्या ही नहीं होती। हर समस्या का समाधान है हमारे ज्योतिष शास्त्र और इधर लोकप्रिय हुए वास्तुशास्त्र के पास। कारण चाहे जो भी हो अख़बार टीवी वाले भी इस से सहमत हैं , तभी हर दिन इनको प्रचारित करते हैं। इन्हीं की अनुकंपा से मालामाल भी हैं। नया राज्य बना और नये मुख्यमंत्री को पता चला कि हैदराबाद का पुराना मुख्यमंत्री निवास वास्तु दोष से ग्रस्त है। खुद अपना घर होता तो उनसे सलाह लेकर कोई दरवाज़ा कोई खिड़की बदलवा उसको ठीक कर लेते। कोई पौधा किसी दिशा में लगाते या रसोई घर की जगह बदल जाती। खुद अपनी सुरक्षा का भी उपाय है , घर को किसी खास रंग में पेंट करवा महंगे फर्नीचर से सजा कर मुख्यद्वार के दोनों तरफ धातू की बनी ऊंची ऊंची योद्धा की मूर्ति रख लेते। वास्तु वाले इनको सुरक्षा कवच बताते हैं , हम भी ऐसा करने को बुरा नहीं बताते। जब बाकी नेताओं अधिकारियों को अरबों रुपये खर्च कर पाल सकते हैं सफेद हाथी बनाकर जो किसी काम नहीं आते तो ये भी स्वीकार कर लेते। मगर ये तो ज़रूरी नहीं था कल खबर सुनी कि ऐसा किया गया वास्तु दोष के कारण।
                                      इक नया मुख्यमंत्री आवास बनाया गया आठ महीने के काल में इक रिकॉर्ड की तरह 3 8 करोड़ की राशि खर्च कर के। इसको लोकतंत्र कहते हैं , राजा का हुक्म हुआ और ताजमहल बना दिया गया जनता के धन से सभी ने वाह ताज कहा चाय की चुस्की लेकर। देखो उनकी जान को खतरा है , उनका स्नान घर तक बुलेट प्रूफ है शयनकक्ष ही नहीं। ऐसे मौत से डरे लोग भाषण देंगे जनता को साहस से काम लो निडर बनो और भगवान पर भरोसा रखो। इनको तमाम पूजा पाठ हवन यज्ञ करने करवाने के बाद भी भगवान पर इतना यकीन नहीं कि इनको बेमौत नहीं मरने देगा। इनकी जान कीमती है जनता की सेवा करनी है इसी तरह बहुत साल तक , बस चले तो आखिरी सांस भी सत्ता की गद्दी पर बैठे लेना चाहेंगे। हैरानी की बात है अपने देश के नेताओं की धर्म में बड़ी आस्था रहती है खुद की खातिर , मगर जब ईमानदारी से राजधर्म का पालन करने की बात हो तब उनको कुछ याद ही नहीं रहता।
                                          याद आया अटल जी ने कभी उनको राजधर्म निभाने का संदेश दिया था। सत्ता मिलते सीस झुकाया जिस मंदिर की चौखट पर आजकल उसी में प्रवेश करने से बचते हैं। जब आपने कुछ गलत किया ही नहीं तो छप्पन इंच की छाती ठोक देते जवाब विपक्ष को। मगर इक सच मनोविज्ञानिक बताते हैं कि जो सुरक्षा कर्मी रखते हैं उनको डर सब से अधिक लगता है। लगता है अभी उनको समझ नहीं आ रहा कि अपने उचित निर्णय को उचित साबित कैसे करें , उनको सवाल पूछने वाले ही गलत लगते हैं। इसलिये नाराज़ प्रेमिका की तरह कहना चाहते हैं जाओ मैं नहीं बोलती। वे मैं नहीं बोलणा , क्या गीत है , तेरे सामणे बैठ के रोणा दिल दा दुखड़ा नहीं खोलणा। जाओ कोई उनके आवास पर उनके आंसू पौंछ कर मना लाओ , बस बहुत हुआ रूठना अब मान भी जाओ ।  ओह बात कुछ और हो रही थी कहां बीच में काला धन आ गया , करें क्या आजकल यही हो रहा है। सवाल आया था कि क्या नोट बंद करने से सब ठीक हो जायेगा और जो अभी तलक काले कारनामे करते रहे उनके पाप इस से धुल जायेंगे। क्या ये गंगा स्नान है सभी नेताओं के इतने साल तक दो नंबर के धन से चुनाव लड़ने के बाद उसका प्रायश्चित है। इक कथा है मां पार्वती ने शिवजी से यही पूछा था , और शिव जी ने जवाब दिया कि जो केवल तन गीला करते हैं उनको मोक्ष नहीं मिलता पर जो मन को पवित्र करते स्नान कर बस उन्हीं के पाप समाप्त हो जाते हैं। मगर कौन मात्र तन से नहाया कौन मन का मैल भी धोता कैसे पता चले पूछा पार्वती जी ने। शिवजी इक कोड़ी का रूप बना और पार्वती को सजी धजी सुंदर औरत बनाकर उसी डगर पे बैठ गये जिस से लोग गंगा स्नान कर वापस लौट रहे थे। लोग पास आते तो पार्वती जी बताती कि ये मेरे पति हैं और मैं इनको कंधे पर लादकर लाई हूं गंगा स्नान को , थक गई इसलिये विश्राम कर रही हूं। लोग बुरी नज़र से देखते और सुंदर नारी देख प्रलोभन दे अपना बनाना चाहते , पार्वती चुप चाप शर्मसार हो जाती ये हालत देख। संध्या को इक पुरुष आये और उनकी बात सुन उसकी आंखों से आंसू की धारा बह निकली , उसने कहा चलो मैं आपकी सहायता करता हूं। उसने शिवजी को अपने कंधे पर उठाकर तट पर पहुंचा दिया और जो सत्तू था उसके पास वो भी खिला दिया। शिवजी पार्वती का प्रयोजन पूरा हो गया था और वो चले गये अपने लोक। देखते हैं इस कलयुगी उपाय से क्या काला राक्षस खत्म होता है अथवा नहीं।
                             विषय पर आते हैं , ज्योतिष शास्त्र की बात की जाये। शुभारंभ बहुत ज़रूरी होता है , और जन्म समय और तिथि ही नहीं जगह भी मिलकर किसी का भविष्य तय कर देते हैं। ये सभी ज्योतिष विशेषज्ञ बताते हैं। हिंदुस्तान जब आज़ाद हुआ और इंडिया नामकरण किया गया तभी भविष्य निर्धारित हो गया था। तब ग्रह सिथ्ति बन गई थी , आज़ादी मिली चौदह - पंद्रह की आधी रात को , तभी आज़ादी का पक्ष सदा अंधेरा ही रहा , उजाला ढूंढने वाले निराश हुए और काले कारनामे और धंधे वालों को पूरी आज़ादी रही। पी एम कहना प्रधानमंत्री नाम रखना भी ऐसा ही था , पी एम शाम का समय होता है और प्रधानमंत्री जीवन की शाम में ही बने लोग। इक युवा बने तो उनकी आयु भी कम ही रही। अभी कल पूर्व प्रधानमंत्री बता रहे थे नोट बंदी से कितने प्रतिशत क्या कमी होगी , वही पी एम कहते थे मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं जो बता सकूं महंगाई कब कम होगी। महंगाई डायन और गरीबी पापिन दोनों की कुंडली बनवा देखी जाये कब उनको राहू केतु की दशा खत्म करेगी। चलो आखिर में आज की नई इक कथा लिखते हैं ताकि सनद रहे और ज़रूरत पर काम आये , अरे ये तो वकीलों की भाषा है। पर इधर कथा पुराने ढंग की समझता कौन है इसलिये यही उचित है।
                उस माता के दो पुत्र हैं , नेता और अधिकारी , और एक बेटी है जनता अनचाही औलाद जैसी। बड़े बेटे को सत्ता सभी अधिकार खुद देती है , छोटा जानता है नहीं मिलें तो कैसे छीन सकते हैं। देश की एक तियाही जनता की तरह बेटी को लेकर मां सोचती है अच्छा होता ये अभागी जन्म ही नहीं लेती। यही मापदंड है समाज का बेटा अपकर्म लूट मर करता रहे तब भी बुरा नहीं , बेटी की ज़रा सी बात भी बदनामी का सबब बन जाती है। गरीबी इक कलंक है जनता की दशा इक अभिशाप। कसूर किसी का नहीं विधाता ने इनका भाग्य ऐसा ही लिखा है। कितने उपाय किये सभी ने , आरक्षण देने से महिला आयोग बनाने , और मनरेगा से पहले भी कितने सूत्री कार्यक्रम चलाकर। कोई पता करे किसी वास्तु शास्त्र वाले या अंक शास्त्री अथवा ज्योतिष पंडित से , कोई उपाय ऐसा ही सही , और सब आज़मा लिया सबने।

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