जुलाई 26, 2026

POST : 2093 आज़ाद भारत की तस्वीर ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

आज़ाद भारत की तस्वीर ( कविता ) डॉ लोक सेतिया 

 
इंसां सभी  होंगे इक बराबर अब यहां 
हम सब बनाएंगे इक ऐसा अपना जहां  
 
फूल प्यार के खिले होंगे यहां चहुंओर  
रहेगा नहीं समाज में नफरत का धुंवा ।
 
कहीं किसी पे न होगा कोई अत्याचार 
राजनीति नहीं बनी रहेगी इक व्यौपार 
 
शिक्षा रोज़गार सभी मौलिक अधिकार  
जनसेवा का बंद होगा हर सट्टा बाज़ार । 
 
हर इक बेटी होगी कोईजैसे शाहज़ादी  
जीने की सभी को मिलेगी हर आज़ादी 
 
दहेज नहीं कोई न कोई बाल मज़दूरी   
ख़त्म करना सब बहुत हो चुकी बर्बादी ।
 
प्रशासन का नहीं हो ऐसा बुरा हाल 
बीमार हैं नहीं होंगे स्कूल अस्पताल 
 
अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग 
नहीं चलेगा देश का होगा इक सुर ताल ।    

लूट रहे हैं बन कर देश सेवक सभी नेता 
यही है देश की जनता की बड़ी परेशानी 
 
कौन बताए उनको क्या आज़ादी का अर्थ 
उनको क्या मालूम क्या शहीदों की कहानी ।
 
भूल गए हैं शायद हम भी फ़र्ज़ निभाना इक  
देश और समाज कल्याण का क्या हो मकसद 
 
फिर से कोई सबक पढ़ाए स्वार्थ छोड़ अपने 
आज़ादी की ख़ातिर देंगे खुदगर्ज़ी की कुर्बानी । 
 
 आजाद भारत: Independent India

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