जुलाई 15, 2026

POST : 2084 आईना झूठ बोलने लगा है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

       आईना झूठ बोलने लगा है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  

आईना झूठ बोलने लगा है 
वो तराज़ू भी डोलने लगा है । 
 
अपनी कीमत बड़ा-चढ़ा रहे सब 
अपने को आप तोलने लगा है । 
 
हर तरफ लूटमार हो रही है 
अब लहू सबका खौलने लगा है ।  
 
क्या सियासत की बात पूछते हो 
फिर वही  ज़हर घोलने लगा है । 
 
चोर को छोड़ कोतवाल अब तो 
रह गया कुछ , टटोलने लगा है । 
 
चीज़ अनमोल मिल गई किसी को 
धूल में उसको  रौलने लगा है । 
 
जान से हाथ धोएगा किसी दिन 
' लोक ' सच रोज़ बोलने लगा है ।  
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Wahhh सच रोज़ बोलने लगा है