आईना झूठ बोलने लगा है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया
आईना झूठ बोलने लगा है
वो तराज़ू भी डोलने लगा है ।
अपनी कीमत बड़ा-चढ़ा रहे सब
अपने को आप तोलने लगा है ।
हर तरफ लूटमार हो रही है
अब लहू सबका खौलने लगा है ।
क्या सियासत की बात पूछते हो
फिर वही ज़हर घोलने लगा है ।
चोर को छोड़ कोतवाल अब तो
रह गया कुछ , टटोलने लगा है ।
चीज़ अनमोल मिल गई किसी को
धूल में उसको रौलने लगा है ।
जान से हाथ धोएगा किसी दिन
' लोक ' सच रोज़ बोलने लगा है ।

1 टिप्पणी:
Wahhh सच रोज़ बोलने लगा है
एक टिप्पणी भेजें